गाजियाबाद। सोशल मीडिया पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ कथित फर्जी एआई वीडियो और भ्रामक सामग्री पोस्ट किए जाने के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (कोर्ट संख्या-4) के पीठासीन अधिकारी मानस वत्स ने मसूरी थाना पुलिस को अज्ञात आरोपियों के खिलाफ उचित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर कानूनी जांच शुरू करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने पुलिस को दो दिन के भीतर एफआईआर की प्रति कोर्ट में पेश करने का निर्देश भी दिया है।
मामला सपा से जुड़े मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के जिलाध्यक्ष इरफान अमानत चौधरी की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 173(4) के तहत दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान सामने आया। इरफान ने अदालत को बताया कि 15 अप्रैल 2026 को उन्हें जानकारी मिली थी कि फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुछ अज्ञात लोग फर्जी आईडी बनाकर सपा प्रमुख के खिलाफ भ्रामक वीडियो और आपत्तिजनक पोस्ट प्रसारित कर रहे हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का दुरुपयोग कर अखिलेश यादव की आवाज जैसी फर्जी ऑडियो तैयार कर मनगढ़ंत बयान वायरल किए जा रहे हैं। साथ ही फेसबुक पर ‘बुआ-बबुआ’ नामक अकाउंट व इंस्टाग्राम पर ‘लाल टोपी काले कारनामे’ नाम की आईडी से लगातार भ्रामक और अशोभनीय सामग्री पोस्ट की जा रही है। आरोप है कि इन अकाउंट्स को संचालित करने वाले लोग अपनी पहचान छिपाकर दुर्भावनापूर्ण तरीके से सामाजिक वैमनस्य फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।
प्रार्थी के अनुसार, मामले में 17 अप्रैल 2026 को थाना मसूरी और उच्चाधिकारियों से शिकायत भी की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद अदालत की शरण ली गई।