गाजियाबाद। नगर निगम में कांट्रेक्टरों की एफडीआर (फिक्स डिपोजिट रिसीप्ट)गायब होने का मामला सामने आया है। एफडीआर गायब होने की वजह से अब ठेका भी हाथ से चला गया। कांट्रेक्टर ने निगम अफसरों पर आरोप लगाया कि उन्होंने इस्टीमेंट से 12.25 फीसदी कम दर पर निविदा डालने के बावजूद उसे ठेका नहीं दिया बल्कि सिर्फ 6 फीसदी कम वाले को टेंडर दे दिया।
कांट्रेक्टर फर्म ने महापौर और नगर आयुक्त से जांच की मांग की है। ऐसा मामला पहली बार नगर निगम में सामने आया है। प्रिंस ट्रेडिंग कंपनी ने 22 अक्तूबर को टेंडर संख्या-165 के लिए 30 हजार रुपये की एफडीआर निगम के बॉक्स में डाली थी।
फर्म के संचालक का कहना है कि बाद में उनकी एफडीआर गायब कर दी गई। इसकी वजह से उन्हें टेंडर प्रक्रिया से भी बाहर कर दिया गया। उन्होंने टेंडर 12.25 फीसदी कम पर डाला था, लेकिन अधिकारियों ने उन्हें टेंडर न देकर 6 फीसदी कम वाले कांट्रेक्टर को दे दिया।
यानी नगर निगम को 6.25 फीसदी रकम का नुकसान भी हुआ है। उन्होंने महापौर अशु वर्मा, नगर आयुक्त अब्दुल समद से जांच और एफडीआर दिलाने की मांग की है। नगर आयुक्त अब्दुल समद का कहना है कि चीफ इंजीनियर को मामले की जांच के निर्देश देकर रिपोर्ट मांगी गई है।