गाजीपुर बॉर्डर पर भाजपा और किसानों में भिड़ंत के मामले में गुरुवार को पुलिस ने भाकियू की शिकायत पर 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली। रिपोर्ट के बाद भाकियू ने टोल फ्री का एलान वापस ले लिया।
इससे पहले दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर भाजपाई और किसानों के बीच हुए बवाल में बुधवार रात महिला नेता की शिकायत पर केस दर्ज होने के बाद भाकियू ने गुरुवार सुबह थानों का घेराव और टोल फ्री करने का एलान किया था। इससे प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की चिंता बढ़ गई।
यूपी गेट पर राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने पदाधिकारियों के बीच बैठक कर आगे की रणनीति बताई। शाम तक किसानों को उनकी तहरीर पर मुकदमा दर्ज करने का भरोसा दिया गया। उधर, दिल्ली त्रिलोकपुरी से आप विधायक रोहित मेहरोलिया ने यूपी गेट पहुंचकर राकेश टिकैत से मुलाकात की।
भाकियू के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने बताया कि यूपी गेट पर भाजपाई और किसानों के बीच हुई घटना में पुलिस प्रशासन ने सिर्फ भाजपा महिला नेता की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया। जबकि, भाकियू के जिलाध्यक्ष चौ. बिजेंद्र सिंह की तरफ से भी लिखित शिकायत देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई थी। इसके बावजूद पुलिस ने दोपहर बाद तक भी मुकदमा नहीं लिखा। इससे किसानों में रोष है।
गुरुवार सुबह यूपी गेट पर किसान नेता राकेश टिकैत और पदाधिकारियों के बीच गोपनीय बैठक हुई। साथ ही मुकदमा दर्ज कराने के लिए पुलिस अधिकारियों को दोबारा कहा गया। जहां रणनीति के तहत भाकियू ने सुबह करीब 11 बजे सोशल मीडिया और अन्य सूचना तंत्रों से किसान संगठनों को थानों का घेराव करने व टोल को फ्री कराने का आह्वान कर दिया। किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली और गाड़ियों में सवार होकर नजदीकी थानों पर घेराव करने पहुंच गए।
वहीं, यूपी गेट पर भाकियू के पदाधिकारी किसानों से घेराव से टोल फ्री करने की पल-पल की सूचना एकत्र करते रहे। मीडिया प्रभारी ने कहा कि किसानों पर हमला करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई न कर पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई की है। किसान इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। जब तक किसानों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज नहीं होगा। तब तक थानों पर किसानों का घेराव और टोल प्लाजा को फ्री रखने का कार्यक्रम जारी रहेगा।
मीडिया प्रभारी का आरोप है कि बुधवार को दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर भाजपाइयों द्वारा मंच पर कब्जा करने की कोशिश व मारपीट की घटना में पुलिस ने 200 अज्ञात के ऊपर मुकदमा दर्ज किया है। यह आंदोलनकारियों को दबाने का प्रयास है।