कृषि कानूनों खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर किसान आंदोलन में शामिल संगरूर के गांव बखोपीर के किसान गुरचरण सिंह की ठंड लगने से मौत हो गई। यूनियन के ब्लॉक उपाध्यक्ष गुरभजन सिंह बखोपीर ने बताया कि मृतक किसान गुरचरण सिंह (67) कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन में शामिल होने गए थे। अधिक ठंड लगने से गुरचरण सिंह की तबीयत खराब हो गई और वह रविवार को घर आ गए लेकिन रात को तबीयत अधिक बिगड़ने से उनकी मौत हो गई।
भारतीय किसान यूनियन के युधवीर सिंह ने कहा कि मंत्री चाहते थे कि हम कानून-वार चर्चा करें। हमने इसे खारिज कर दिया और कहा कि कानूनों पर चर्चा करने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि हम कानूनों का पूरा रोलबैक चाहते हैं। सरकार हमें संशोधन की ओर ले जाने का इरादा रखती है लेकिन हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे।
अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि सरकार काफी दबाव में है। हम सभी ने कहा कि यह हमारी मांग है (कानूनों को निरस्त करना)। हम कानूनों को निरस्त करने के अलावा किसी अन्य विषय पर चर्चा नहीं चाहते हैं। कानूनों को निरस्त करने तक विरोध वापस नहीं लिया जाएगा।
सरकार के साथ मुलाकात के बाद किसान नेता दर्शन पाल ने कहा कि सरकार को यह बात समझ आ गई है कि किसान संगठन कृषि क़ानूनों को रद्द किए बिना कोई बात नहीं करना चाहते हैं। हमसे पूछा गया कि क्या आप क़ानून को रद्द किए बिना नहीं मानेंगे, हमने कहा हम नहीं मानेंगे।
सरकार के साथ मुलाकात के बाद किसान नेता ने कहा कि हमने बताया कि पहले कृषि क़ानूनों को वापिस किया जाए, MSP पर बात बाद में करेंगे। 8 तारीख तक का समय सरकार ने मांगा है। उन्होंने कहा कि 8 तारीख को हम सोचकर आएंगे कि ये क़ानून वापिस हम कैसे कर सकते हैं, इसकी प्रक्रिया क्या हो।
राकेश टिकैत ने कहा कि 8 जनवरी 2021 को सरकार के साथ फिर से मुलाकात होगी। तीनों कृषि क़ानूनों को वापस लेने पर और MSP दोनों मुद्दों पर 8 तारीख को फिर से बात होगी। हमने बता दिया है क़ानून वापसी नहीं तो घर वापसी नहीं।
सरकार के साथ किसान नेताओं की मुलाकात के बाद किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि कानून रद्द करने और एमएसपी पर आज चर्चा हुई। उन्होंने ये भी कहा कि कानून वापसी नहीं तो घर वापसी नहीं।
कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने बताया कि आज हम किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके। बैठक का माहौल अच्छा था लेकिन किसान संगठनों के कानून रद्द कराने की मांग पर अड़े रहने के कारण कोई हल नहीं निकला। लेकिन मैं आशावान हूं कि अगली बैठक जो 8 जनवरी को होगी उसमें कोई न कोई नतीजा निकलेगा। हमने किसानों को क्लॉज वाइज चर्चा करने को कहा और कुछ चर्चा एमएसपी पर भी हुई। हमें उम्मीद है कि आज की जैसी बात रही उसके हिसाब से अगली बैठक में हल निकलेगा।
केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने किसानों को लेकर प्रियंका गांधी के ट्वीट पर कहा कि, कांग्रेस के पास किसानों और ग्रामीण मजदूर की समझ रखने वाला कोई नेता नहीं है। उन्हें ही नहीं पता कि उन्होंने 2 साल पहले क्या बोला और 2 दिन पहले क्या बोला। इसलिए ऐसे लोगों को टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
आज की बैठक के दौरान लंच ब्रेक में किसानों ने मंत्रियों के साथ खाने से इनकार कर दिया और उनके साथ नहीं खाया।
किसान नेताओं की सरकार से वार्ता पर मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कमल पटेल ने कहा कि अगर बिचौलिए हटेंगे तो किसान की आय बढ़ेगी, अब किसान को आर्थिक आज़ादी मिली है, इसलिए पूरे देश का किसान मोदी जी के साथ है। अगर किसान नेता चाहते हैं कि किसान का भला हो, तो वो इस क़ानून का समर्थन करेंगे।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा की सरकार पर किसानों को बिल्कुल भरोसा नहीं है। मंडी बंद कर दी, मंडी बेच दी, कितने किसानों पर आंसू गैस के गोले चलाए गए, कितनों की हत्या हो गई, कितनों ने आत्महत्या कर ली और कितनों की जानें चली गई लेकिन सरकार को परवाह नहीं है।
विरोध प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के लिए केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, पीयूष गोयल, सोमप्रकाश ने किसान नेताओं के साथ विज्ञान भवन में दो मिनट का मौन रखा।
आज की बैठक के दौरान आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को सरकार, अफसरों और किसान नेताओं ने श्रद्धांजलि दी। उन्होंने किसानों के लिए दो मिनट का मौन भी रखा।
किसान नेताओं और सरकार की बैठक शुरू हो चुकी है। इसमें हर बार की तरह केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर, पीयूष गोयल और सोम प्रकाश मौजूद हैं।
किसान नेताओं और सरकार की बैठक शुरू हो गई है। इस बैठक से जहां किसान नेताओं को बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं है, वहीं कृषि मंत्री ने आज की बैठक में हल निकलने की बात कही है।
किसानों के साथ सरकार की बैठक पर कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा, देश सरकार की तरफ देख रहा है। सरकार से आग्रह है कि किसानियत नहीं तो कम से कम इंसानियत को देखते हुए, प्रजा की बात मानने से कोई शासक छोटा नहीं होता।
केजरीवाल ने किसान आंदोलन को लेकर आज कहा है कि, ठंड और बारिश के बीच सड़कों पर डटे हमारे किसानों के हौंसले को सलाम। मेरी केंद्र सरकार से अपील है कि आज की बैठक में किसानों की सारी मांगें मानते हुए तीनों काले कानून वापस लिए जाएं।
किसान नेता शिव कुमार कक्का ने बैठक से पहले कहा कि मोदी सरकार डब्ल्यूटीओ जाकर हस्ताक्षर कर चुकी है कि वह किसानों का उत्पाद समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदेगी। इसलिए हम ये आंदोलन कर रहे हैं और एमएसपी पर कानून चाहते हैं।
किसानों ने बारिश से बचने के लिए अपने ट्रैक्टर और ट्रालियों पर तिरपाल लगा लिया है। उनका कहना है कि चाहे जो भी समस्या हो हम सहेंगे लेकिन कानून रद्द करवाए बिना नहीं जाएंगे।
कृषि कानूनों पर चर्चा के लिए किसान संगठनों का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली स्थित विज्ञान भवन पहुंचा है। कुछ ही देर में किसानों और सराकर के बीच बैठक शुरू होगी।
किसानों के आंदोलन के बीच एक बार फिर प्रियंका गांधी ने सराकार पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि सरकार एक तरफ तो किसानों को बातचीत के लिए बुलाती है दूसरी तरफ इस कड़कड़ाती ठंड में उन पर आंसू गैस के गोले बरसा रही है। इसी अड़ियल और क्रूर व्यवहार की वजह से अब तक लगभग 60 किसानों की जान जा चुकी है। किसान कैसे विश्वास करे इस क्रूर सरकार पर?
कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने किसानों के साथ होने वाली बैठक से पहले कहा है कि उन्हें आशा है कि आज समस्या का कोई समाधान जरूर निकलेगा। हम बैठक में हर मुद्दे पर चर्चा करेंगे।
गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आज कहा कि, अब तक 60 किसान अपनी जिंदगियां गंवा चुके हैं। हर 16 घंटे में एक किसान मर रहा है। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जवाब दे।
मुरादनगर में हुई घटना के बाद यूपी गेट पर किसानों ने सोमवार को मंच का संचालन नहीं करने का निर्णय लिया है। भकियू मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने बताया कि हादसे में मारे गए लोगों को आज शाम किसान श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
हरियाणा में बीती रात किसानों पर छोड़े गए आंसू गैस के गोलों की घटना के बाद आम आदमी पार्टी ने हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर पर निशाना साधा है। आप विधायक राघव चड्ढा ने कहा है कि, 'सीएम खट्टर जनरल डायर की तरह हैं जो किसानों पर फायर करवा रहे हैं, आंसू गैस के गोले उन पर प्रयोग करवा रहे हैं। क्या देश के किसान हमारे दुश्मन हैं? क्या वो चीन या पाकिस्तान के सैनिक हैं? यह बेहद शर्मनाक है।'
समाज के कई वर्गों के बाद अब किसानों को बौद्ध भिक्षुओं का भी साथ मिल गया है। गाजीपुर बॉर्डर पर कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन 38वें दिन भी जारी है। प्रदर्शन में बौध भिक्षुओं ने हिस्सा लिया। एक बौध भिक्षु ने बताया, 'हम लखनऊ से आए हैं। किसान सड़क पर हैं इसलिए हम मठों को छोड़ किसानों के साथ आए हैं। जब तक कानून वापस नहीं होंगे हम नहीं जाएंगे।'
कृषि कानूनों के खिलाफ बुराड़ी के निरंकारी समागम ग्राउंड में किसानों का प्रदर्शन जारी है। फरीदकोट के जिला प्रधान बिंदर सिंह गोलेवाला ने बताया, 'आज की बैठक में तीन कानूनों को रद्द करने की बात चलेगी। उम्मीद है कि बैठक में कुछ हल निकलेगा, अगर नहीं निकला तो हमारा संघर्ष चलता रहेगा।'
कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर पर चल रहे किसानों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए बॉर्डर पर सुरक्षा बल तैनात है। आज किसानों और केंद्र सरकार की बैठक होगी। #FarmersProtest pic.twitter.com/fCxneQROZ4
सोमवार को होने वाली वार्ता असफल होने पर किसान केेएमपी व केजीपी पर कब्जा कर लेगा। 6 जनवरी को ट्रैक्टर रैली निकाली जाएगी। किसान केएमपी-केजीपी के रास्ते सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर व चिल्ला बॉर्डर पर चल रहे धरने में शामिल होंगे। रैली के लिए 5 जनवरी को गांवों में जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। पाल व खापों के हिसाब से जिम्मेदारी तय की जाएगी। भारतीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का ने इस संबंध में किसानों से वार्ता भी की।