गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में शिक्षित और युवा किसानों ने समर्थन देकर एक बार फिर से जान भर दी है। हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के बड़ी संख्या में युवा किसान अपने समर्थन देने के लिए गाजीपुर बॉर्डर पहुंच गए हैं।
समर्थन देने वालों में मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्र, कारोबारी युवा, आईआईटी कानपुर के छात्र भी पहुंचे हैं। युवाओं का कहना है कि उन्हें एक मुकाम तक पहुंचाने में उनके अभिभावकों ने खेतों में खून पसीना बहाया है, अब इनके आंसू हम व्यर्थ नहीं जाने देंगे।
जब तक मांगें नहीं मानी जाती वह आंदोलन में डटे रहेंगे। उधर, राजनीतिक पार्टियों की युवा विंग भी आंदोलन में समर्थन में आगे आ रही है। कृषि कानूनों के विरोध में बैठे किसानों का आंदोलन गाजीपुर बॉर्डर पर 26 जनवरी को हुई ट्रैक्टर रैली के बाद कमजोर पड़ गया था। आंदोलन टूटने की कगार पहुंच गया।
इस दौरान भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का दर्द आंसू बनकर छलक गया। यह देख रातों रात किसानों का पंजाब, उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश से गाजीपुर बॉर्डर पहुंचना शुरू हो गया। अब आंदोलन में युवाओं की लगातार तादात बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों से शिक्षित और युवा किसान कार और ट्रैक्टर-ट्रॉली से पहुंच रहे हैं।