ड्रग विभाग के अधिकारियों का कहना हे कि इन चारों लोगों के पास न तो दवाओं को बनाने का और न ही भंडारण का लाइसेंस है। इसके पास दवाओं के खरीद-फरोख्त के दस्तावेज भी नहीं मिले। औषधि विभाग के अधिकारियों ने यहां मिली दवाओं में से 14 नमूने लेकर सील किए हैं। यहां मिली दवाओं और अन्य सामान को गत्ते के 44 कार्टन और 12 बोरों में भरकर जब्त कर लिया गया है। इनके अलावा दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीम ने भी दवाओं के नमूने लिए हैं।
डॉक्टर और इंजीनियर चला रहे थे नकली दवाओं का कारोबार
औषधि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस कारोबार को करने वाले पवित्र प्रधान एमबीबीएस डॉक्टर हैं और शुभम मुन्ना बी-टेक इंजीनियर हैं। बाकी दो साझेदार पंकज सिंह और अंकित शर्मा भी इस नकली दवाओं के कारोबार में शामिल हैं। उनका कहना है कि एंटी कैंसर दवाओं की बाजार में भारी डिमांड रहती है और इसमें मोटा मुनाफा होता है। इसी मुनाफे के लिए यह नकली दवाओं के कारोबार को कर रहे थे।
15 दिन पहले किराए पर ली थी बिल्डिंग
औषधि विभाग की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में बताया गया कि जिस बिल्डिंग में नकली दवाओं का यह कारोबार किया जा रहा था, वह सुनीता यादव नाम की महिला के नाम पर है। इस मकान को 15 दिन पहले अंकित कुमार पुत्र अशोक निवासी गोठरा, बागपत ने किराए पर लिया था।
संभल में भी मिला था नकली दवाओं का जखीरा
बीते दिनों गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर और संभल के औषधि विभाग की टीम ने संभल में संयुक्त छापामारी कर बड़ी मात्रा में नकली दवाएं बरामद की थी। इन दवाओं की आपूर्ति एनसीआर के कई क्षेत्रों में की जा रही थी। इससे करीब डेढ़ महीने पहले बागपत में भी संयुक्त रूप से कार्रवाई कर नकली दवाएं पकड़ी गई थीं।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की सूचना पर औषधि विभाग ने संयुक्त कार्रवाई की है। बड़ी मात्रा में नकली दवाएं और अन्य उपकरण मिले हैं। एफआईआर दर्ज करा दी गई है। अभी जांच जारी है। - अनुरोध कुमार, औषधि निरीक्षक, गाजियाबाद