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Ghaziabad News: हर नौवां व्यक्ति किसी न किसी संक्रमण से ग्रसित

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आशुतोष यादव
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गाजियाबाद। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के नए अध्ययन ने वायरल संक्रमण के बढ़ते मामलों को गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बताया है। रिपोर्ट के अनुसार देश में हर नौवां व्यक्ति किसी न किसी तरह की इंफेक्शियस डिजीज (स्पर्श संचारी बीमारियों) से ग्रस्त पाया गया है।
जनवरी से जून 2025 के बीच संक्रमण दर 0.8 फीसदी बढ़कर 10.7 प्रतिशत से 11.5 प्रतिशत हो गई है। इससे साफ है कि लोग हर मौसम में वायरल बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। आईसीएमआर के अध्ययन में जिन वायरसों के मामले सबसे अधिक पाए गए, उनमें इंफ्लुएंजा ए, डेंगू, हेपेटाइटिस ए, नोरोवायरस और हर्पीस सिंप्लेक्स प्रमुख हैं।
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शहर के एमएमजी अस्पताल में भी रोजाना 800 से 900 मरीज आ रहे हैं, जो किसी न किसी संक्रमण से ग्रसित हैं। एमएमजी अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आलोक रंजन का कहना है कि अब वायरल संक्रमण को वर्षभर चलने वाली स्वास्थ्य चुनौतियों की तरह देखना होगा, क्योंकि मौसम बदलते ही संक्रमण की रफ्तार बढ़ जाती है। तापमान में उतार-चढ़ाव प्रतिरोधक क्षमता को अस्थायी रूप से कमजोर कर देता है। इससे सर्दी, खांसी, बुखार, फ्लू और पेट के संक्रमण बढ़ जाते हैं।
बताया कि वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण के लक्षण व इलाज में भी बड़ा अंतर है। वायरल संक्रमण आमतौर पर छींक, खांसी या संक्रमित सतह छूने से फैलता है और पांच से सात दिन में खुद ठीक हो जाता है। वहीं, बैक्टीरियल संक्रमण दूषित भोजन, पानी या घाव के संपर्क में आने से फैलता है। इसमें एंटीबायोटिक दवाओं की जरूरत होती है।

अधिक भीड़ और संपर्क से बढ़ रहा संक्रमण
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के प्रदेश सचिव व वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष अग्रवाल का कहना है कि शहरी आबादी विशेष रूप से प्रभावित हो रही है। घनी जनसंख्या, प्रदूषण, गंदगी और जलवायु परिवर्तन वायरल संक्रमण को तेजी से फैलने के लिए अनुकूल माहौल दे रहे हैं। शहरों में सार्वजनिक परिवहन, बाजार और कार्यालयों में रोजाना हजारों लोगों का संपर्क वायरस के प्रसार को बढ़ा रहा है। वायु प्रदूषण फेफड़ों के साथ प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर रहा है। इससे शरीर मामूली वायरस से भी जल्दी प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा कोरोनाकाल में बड़ी संख्या में लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हुई। इसका असर भी देखा जा रहा है।
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जंक फूड, कम नींद और तनाव प्रभावित कर रहे प्रतिरोधक क्षमता
एकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियन ऑफ इंडिया (एएफपीआई) के चेयरमैन डॉ. रमन कुमार का कहना है कि तेज गर्मी, अचानक बारिश और बढ़ती नमी वायरस के जीवित रहने व फैलने के लिए अनुकूल स्थितियां तैयार करती हैं। मानसून में डेंगू, चिकनगुनिया और जीका के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं। वहीं गंदगी और दूषित पानी मच्छरों व वायरस के पनपने का प्रमुख कारण बनते हैं। इससे हेपेटाइटिस ए, नोरोवायरस और डेंगू जैसे संक्रमणों में वृद्धि हो रही है। खराब लाइफस्टाइल, जंक फूड, कम नींद और तनाव भी प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर रहे हैं। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग, गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज व ज्यादा भीड़भाड़ वाले इलाकों में रहने वाले लोगों में संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि व्यक्तिगत स्वच्छता, साफ पानी का उपयोग, अच्छे खानपान, पर्याप्त नींद और प्रदूषण से बचाव जैसे बुनियादी उपाय अपनाकर जोखिम को कम किया जा सकता है।
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