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शक्ति स्वरूपा: हादसों से हार नहीं...हौसले से लिखी जीत की इबारत

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गाजियाबाद। नवरात्र में मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की आराधना साहस, निर्भीकता और शक्ति के संचार का संदेश देती है। मां का यह स्वरूप बताता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, हौसले और संकल्प के आगे मुश्किलें छोटी पड़ जाती हैं। गाजियाबाद की बेटियों की खेल यात्रा भी इसी संदेश को जीवंत करती है। साक्षी कसाना ने सड़क हादसे में जिंदगी बदल जाने के बाद खेल के मैदान को अपनी नई पहचान बनाया, रिया कश्यप ने जूडो के दांव-पेंच से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर तय किया, जबकि श्वेता पाल एक हाथ खोने के बाद भी निशानेबाजी में अपनी पहचान बनाने में जुटी हैं। वहीं, 52 वर्षीय गीतिका श्रीवास्तव ने पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाने के बाद बचपन के सपने को साकार करने की राह चुन ली

1. हादसे के बाद खेल ने दी नई पहचान
गाजियाबाद के रजापुर निवासी साक्षी कसाना स्कूल में फुटबाल टीम की कप्तान रहीं। वर्ष 2017 में सड़क हादसे में रीढ़ की गंभीर चोट के बाद उनके पैरों की ताकत चली गई। पुनर्वास के दौरान उन्होंने पैरा खेलों से जुड़कर शॉटपुट, डिस्कस थ्रो और जैवलिन थ्रो में अभ्यास शुरू किया। वर्ष 2023 में खेलो इंडिया पैरा गेम्स में डिस्कस थ्रो में स्वर्ण और जैवलिन थ्रो में रजत पदक जीता। विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप और एशियाई पैरा खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करने के बाद उन्होंने पेरिस पैरालंपिक 2024 की महिला डिस्कस थ्रो एफ-55 स्पर्धा में आठवां स्थान हासिल किया। सर्जरी, पारिवारिक दुख और गंभीर जलने की चोट जैसी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने खेल में वापसी का संकल्प नहीं छोड़ा।
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2. जूडो में अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रहीं रिया
पटेलनगर निवासी रिया कश्यप ने वर्ष 2023 की कैडेट राष्ट्रीय जूडो चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर अपने सफर को गति दी। खेलो इंडिया में पदक जीतने के बाद वर्ष 2024 में पेरू के लीमा में आयोजित कैडेट विश्व जूडो चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसी वर्ष अंडर-19 स्कूल राष्ट्रीय जूडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया। उनके पहले कोच डॉ. परवेज अली ने उन्हें जूडो की बारीकियां सिखाईं। वर्तमान में वह भारतीय खेल प्राधिकरण के भोपाल स्थित एक्सीलेंस सेंटर में प्रशिक्षण ले रही हैं और सीनियर स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने में जुटी हैं।
3. एक हाथ से निशाना, पति के साथ अभ्यास
श्वेता पाल ने हादसे में एक हाथ गंवाने के बाद वर्ष 2023 में निशानेबाजी शुरू की। अब वह पति मोहन के साथ नियमित अभ्यास करती हैं। श्वेता का कहना है कि उन्होंने एक हाथ खोया है, लेकिन दूसरा हाथ अब उनका हौसला है। उसी से वह निशाना साधती हैं और खुद को साबित कर रही हैं। श्वेता का लक्ष्य भारत के लिए पदक हासिल करना है। श्वेता ने बताया कि उनका हौसला उनके पति मोहन पाल के भरोसे से आया। एक वक्त पर उम्मीद हार चुकी थीं और आज पदक हासिल कर भारत के लिए खेलने का सपना बना लिया है।
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4. 52 की उम्र में पूरा किया बचपन का सपना
पटेलनगर निवासी गीतिका श्रीवास्तव ने साबित किया कि सपनों को पूरा करने की कोई उम्र नहीं होती। बचपन से शूटर बनने की इच्छा रखने वाली गीतिका वर्ष 2003 में विवाह के बाद परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियों में व्यस्त हो गईं, लेकिन उन्होंने अपना सपना नहीं छोड़ा। दोबारा एयर पिस्टल उठाकर उन्होंने अभ्यास शुरू किया। गीतिका ने वर्ष 2023 में प्री-स्टेट और उत्तर प्रदेश स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किए। वर्ष 2024 और 2025 की प्री-स्टेट प्रतियोगिताओं में रजत और 2025 की राज्य चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया। वर्ष 2026 में भी प्री-स्टेट और उत्तर प्रदेश स्टेट प्रतियोगिताओं में कांस्य पदक जीते। उनकी उपलब्धियां उन महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अपने सपनों को पीछे छोड़ देती हैं।
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