गाजियाबाद। जिले में आर्थिक अपराध के मामले बढ़ने लगे हैं। ऐसे मामलों की जांच के लिए कमिश्नरेट में अब अलग यूनिट बनेगी। इसके लिए पुलिस आयुक्त ने मुख्यालय को प्रस्ताव बनाकर भेजा है। इसे जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इसके बाद ऐसे मामलों की जांच आर्थिक अपराध शाखा की टीम करेंगी। आर्थिक मामलों में विशेषज्ञों के जांच करने से न सिर्फ जांच की गुणवत्ता बढ़ेगी,
बल्कि इनमें तेजी भी आएगी।
गाजियाबाद में कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद आर्थिक अपराधों की समीक्षा की गई। इसमें पता चला कि हर साल औसतन 435 करोड़ के आर्थिक अपराध के मामले दर्ज हो रहे हैं। बीते तीन साल में करीब 1200 करोड़ से ज्यादा के आर्थिक अपराध के मामले दर्ज हुए हैं। समीक्षा में पाया गया कि कमिश्नरेट के सभी थानों में दर्ज होने वाले कुल मामलों में 10.10 फीसदी आर्थिक अपराध के दर्ज हो रहे हैं। यानी हत्या, लूट, चोरी आदि के अलावा यह एक बड़ा क्षेत्र हैं जिसमें अपराध बढ़ रहा है। ऐसे में इन अपराधों की जांच के लिए तकनीकी रूप से एक्सपर्ट टीम की जरूरत है। इस टीम को लीड करने वाला डीसीपी या एडीसीपी स्तर के अधिकारी हो और तेजतर्रार स्टाफ हो। पुलिस आयुक्त की ओर से बीते महीने यह प्रस्ताव तैयार करके पुलिस मुख्यालय भेज दिया गया है। हालांकि प्रदेश स्तर पर आर्थिक अपराध शाखा हैं और बड़े मामलों की जांच इसी शाखा के माध्यम से की जाती है, लेकिन कमिश्नरेट स्तर पर ऐसी यूनिट बन जाने से स्थानीय स्तर पर ही मामलों की जांच की जा सकेगी।
कम हो जाएगा विवेचनाओं का बोझ
फिलहाल लूट, हत्या, डकैती, चोरी, दुष्कर्म के मामलों के साथ-साथ आर्थिक अपराध के मामले भी एक ही थाने में दर्ज भी हो रहे हैं और जांच भी उसी स्तर पर की जा रही है। ऐसे में सब-इंस्पेक्टरों, निरीक्षकों और एसीपी पर विवेचनाओं का बोझ बढ़ रहा है। कई थाने ऐसे हैं जिनमें एक-एक दरोगा पर 38-40 विवेचना है। आर्थिक अपराध की विवेचना के लिए अलग यूनिट बन जाने के बाद थानों में दरोगाओं पर भी विवेचना का बोझ कम हो जाएगा।
6000 करोड़ के आर्थिक अपराध की रिपोर्ट इंदिरापुरम में हुई है दर्ज
गाजियाबाद में हाल ही में अब तक के सबसे बड़े आर्थिक अपराध का मामला दर्ज हुआ है। इसमें 6 हजार करोड़ के घोटाले का आरोप है। शिप्रा एस्टेट लि. के प्रतिनिधि की ओर से इंडिया बुल्स फाइनेंस हाउसिंग के पूर्व चेयरमैन और वाइस चेयरमैन समेत 18 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला इंदिरापुरम थाने में दर्ज कराया है। ऐसे बडे मामलों की जांच के लिए आर्थिक अपराध शाखा की ओर से बेहतर तरीके से जांच की जा सकती है।
400 करोड़ के लोन घोटाले की चल रही जांच
गाजियाबाद में विभिन्न बैंकों से संपत्तियों पर लोन कराने के बहाने करीब 400 करोड़ का घोटाला सामने आ चुका है। इस मामले के मुख्य आरोपी लक्ष्य तंवर पर 2012 से लेकर अब तक कई बैंकों के मैनेजर से मिलकर फर्जी लोन कराने का आरोप है। वह इस मामले में जेल में बंद है। इस मामले में कई एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। आर्थिक अपराध शाखा का गठन हुआ तो ऐसे मामलों की जांच भी फिर यही यूनिट करेगी।
गाजियाबाद में आर्थिक अपराधों के मामलों का ग्राफ बढ़ा है। समीक्षा के बाद गाजियाबाद में फाइनेंशियल क्राइम की जांच के लिए अलग यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो बड़े वित्तीय अपराध के मामलों की जांच आर्थिक अपराध शाखा ही करेगी। - अजय कुमार मिश्र, पुलिस आयुक्त