गाजियाबाद। पांच परिचालकों को बिना किसी नोटिस के नौकरी से निकाले जाने से नाराज इलेक्टि्रक बसों के परिचालकों ने बुधवार को एक बजे कामकाज बंद कर दिया और हड़ताल पर चले गए। सिटी बस सेवा शहर में पूरी तरह ठप हो गई। नाराज परिचालकों ने बहरामपुर डिपो में हंगामा किया। चार घंटे तक सड़कों पर लोग बसों का इंतजार करते रहे। यात्रियों को मजबूरी में ऑटो और ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ा।
40 बसों का संचालन अचानक बंद होने पर एआरएम ज्योति सक्सेना ने मौके पर सुपरवाइजर विपिन व विवेक को भेजा। उन्होंने परिचालकों से बात की लेकिन परिचालकों ने स्पष्ट कहा कि जब तक निकाले गए पांच परिचालकों को नौकरी पर नहीं रखेंगे, वह काम नहीं करेंगे। सुपरवाइजरों ने अधिकारियों से बात कर पांचों के काम पर लौटने के आदेश जारी हुए। इसके बाद शाम करीब पांच बजे परिचालक काम पर लौटे। इसके बाद दोबारा इलेक्टि्रक बसों का रूटों पर संचालन शुरू हुआ।
25 परिचालकों को निकालने का आरोप
परिचालक दीपक का कहना था कि इलेक्टि्रक बसों के परिचालकों को लगातार बिना किसी पूर्व नोटिस के निकाला जा रहा है। किसी भी शिकायत की प्राथमिक जांच तक नहीं कराई जाती। पांच परिचालकों को दो दिन में बाहर कर दिया गया। इस संबंध में उनका पक्ष भी नहीं पूछा गया। पिछले छह माह में 25 लोगाें को नौकरी से निकाल दिया गया, इसमें ऐसे लोग भी शामिल रहे, जिनका कोई दोष नहीं था। एआरएम ने बताया कि परिचालकों की नाराजगी को दूर कर दी गई है।
इन रूटों पर चार घंटे बंद रहा संचालन
मोदीनगर, गोविंदपुरम, दादरी, मुरादनगर लोनी, मसूरी रूटों पर बसें नहीं चलीं।
यात्रियों को हुई परेशानी
गोविंदपुरम, मसूरी, दादरी, मोदीनगर, मुरादनगर, लोनी रूट पर इलेक्टि्रक बसों में 7000 हजार यात्री रोजाना सफर करते हैं। दोपहर में इलेक्टि्रक वाहनाें का संचालन बंद होने से लोगों को परेशानी हुई। मजबूरी में लोगों को ऑटो, ई-रिक्शा और निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा। दैनिक यात्री पवन शर्मा ने बताया कि इलेक्टि्रक बसोें की सबसे ज्यादा उपयोगिता महिलाओं के लिए हैं। सुविधा के हिसाब से इसका दूसरा कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में बसों का संचालन बंद होने से यात्रियों को परेशानी हुई है।