गिनीज बुक रिकॉर्ड के लिए सीएम अखिलेश यादव ने भले ही ग्रीन यूपी की कवायद की हो, मगर अधिकारियों की लापरवाही के चलते यह फेल होती नजर आ रही है। 11 जुलाई को अभियान चलाकर एक ही दिन में वन विभाग ने 80 हजार से ज्यादा पौधे लगा तो दिए मगर अब देखरेख के अभाव में यह पौधे सूखने लगे हैं। उधर, सूखे हुए पौधों से वन विभाग अब यह कहकर पल्ला झाड़ रहा है कि वह पौधे उसके द्वारा लगाए ही नहीं गए।
11 जुलाई को सीएम अखिलेश यादव के निर्देश के बाद पूरे यूपी में एक ही दिन में करीब पांच करोड़ पौधे लगाए जाने का लक्ष्य दिया गया था। गिनीज बुक रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने के लिए चले इस अभियान की कमान प्रत्येक जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई थी।
गाजियाबाद वन विभाग को करीब 80 हजार पौधरोपण का लक्ष्य दिया गया था। पौधों को लगाने के बाद इनकी निगरानी के लिए गूगल मैप की सहायता ली गई थी। गाजियाबाद वन विभाग ने 24 घंटे की समय सीमा के इस टारगेट को मात्र 6 घंटों में ही पूरा कर लिया था। दो दिन बाद प्रत्येक पौधे की रिपोर्ट भी शासन को भेज दी गई थी।
अभियान को 11 दिन ही पूरे हुए हैं और युद्धस्तर पर लगाए गए पौधे अब देखरेख की अभाव में दम तोड़ रहे हैं। शुक्रवार को अमर उजाला टीम ने संजयनगर सेक्टर-23 की मेन रोड और एल ब्लाक की ग्रीन बेल्ट में लगाए गए पौधों का हाल देखा। इनमें से ज्यादातर पौधे झुके नजर आए और कई पौधे पूरी तरह से सूखे मिले।
क्या कहते हैं पर्यावरणविद्
पर्यावरण सचेतक समिति के संरक्षक विजय पाल बघेल ने बताया कि देखरेख के अभाव में करीब 80 प्रतिशत पौधे मर जाते हैं। अधिकारी लापरवाही बरतते हैं। सरकारी विभाग कम पौधे लगाए, लेकिन उनकी देखभाल करे तो हरियाली को काफी बढ़ाया जा सकता है। करोड़ों रुपये सिर्फ कागजों पर ही खर्च होते हैं।
क्या कहते हैं डीएफओ
डीएफओ बीपी सिंह का कहना है कि जितने पौधे लगाए जाते हैं उनकी देखभाल भी होती है। कर्मचारियों की टीम नियमित पौधों में पानी डाला जाता है। जो पौधे सूखे होंगे वह विभाग ने नहीं लगाए हैं।