सावधान! मौत की नहर है, यहां से बच कर निकलना
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। मुरादनगर, मसूरी और पतला निवाड़ी को जाने वाली नहर मौत की नहर बन चुकी है। पिछले कुछ समय में यह नहर एक दर्जन से अधिक लोगों को मौत के मुंह में पहुंचा चुकी है। कई परिवार इसकी बलि चढ़ चुके हैं, लेकिन इतना सब कुछ होने के बाद भी सरकारी सिस्टम गहरी नींद में सोया हुआ है। प्रशासन, सिंचाई विभाग और पीडब्ल्यूडी के अधिकारी और सफेदपोशों ने इस ओर ध्यान देने की जहमत तक नहीं उठाई। हादसे दर हादसे होने के बाद भी किसी ने यहां बैरिकेडिंग या दीवार बनवाने की जरूरत महसूस नहीं की। उसी का नतीजा है कि मसूरी में नहर में पिता-पुत्र की मौत हो गई। यदि नहर किनारे रेलिंग या दीवार होती तो एक और परिवार बर्बाद नहीं होता। हर बार हादसा होने के बाद अधिकारियों की नींद खुलती है। पर कुछ दिन बाद फिर से मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। पतला निवाड़ी से लेकर मुरादनगर और मसूरी तक तीन-तीन विधायकों के क्षेत्र आते हैं, उन्होंने भी इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया। अगर ध्यान देते तो शायद कई परिवारों के चिराग नहीं बुझते।
छोटी होती चली गई दीवार
निवाड़ी पतला मार्ग पर पुल की सुरक्षा दीवार और सड़क में मात्र डेढ़ फीट का अंतर है। ग्रामीणों के अनुसार पहले यह दीवार करीब पांच फीट ऊंची हुआ करती थी। लेकिन जैसे जैसे सड़क ऊंची होती गई, वैसे वैसे दीवार छोटी होती चली गई। जिसके कारण यहां से गुजरने वाले राहगीरों को हमेशा खतरे का अंदेशा बना रहता है। पिछले साल दिसंबर माह में एक बाइक को टक्कर मारने के बाद मर्सिडीज कार निवाड़ी में दीवार तोड़ते हुए नहर की ओर लटक गई। पहिये की नीचे एक पत्थर आने के कारण कार नहर में गिरने से बाल बाल बची। इसी वर्ष जनवरी में एक कैंटर निवाड़ी पुल से नीचे लटक गया था। चालक ने किसी तरह गाड़ी से कूदकर अपनी जान बचाई थी। टूटे हुए हिस्से की कई माह बाद मरम्मत की गई। मगर पुल की दीवार की ऊंचाई बेहद कम होने के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
तीन स्थानों पर खत्म हो गई दीवार
गंगनहर पटरी मार्ग पर बनी सुरक्षा दीवार बेहद जर्जर और कमजोर अवस्था में है। सौंदा पुल से अबुपुर गांव तक की लगभग तीन किमी की दूरी में दीवार कई जगह टूटी हुई है। तीन स्थानों पर तो दीवार लगभग पूरी तरह खत्म हो चुकी है। एक फरवरी की रात एक एक्सयूवी दीवार तोड़कर नहर में गिरी थी। उस स्थान पर भी अभी तक मरम्मत नहीं कराई गई है। इसके अलावा पैंगा मार्ग के सामने भी दीवार खत्म हो चुकी है। यहां से रोजाना हजारों ग्रामीणों का आवागमन होता है। ऐसे में ग्रामीणों को हमेशा दुर्घटना का डर सताता रहता है।
गंगनहर पर हुई कुछ बड़ी घटनाएं-
-29 जुलाई 2018- सौंदा पुल के पास कार गंगनहर में समाई। जीजा-साले की मौत, तीन लोगों को बचाया गया।
23 सितंबर 2018-तेज रफ्तार कार नहर में गिरी, तीन लोग घायल।
8 दिसंबर 2018- ट्रक गंगनहर में गिरा, पांच दिन बाद निकाला गया।
9 दिसंबर 2018- कार गंगनहर में गिरी, तीन इंजीनियर डूबे। एक की मौत, दो को बचाया गया।
20 जनवरी 2019- रोहटा क्षेत्र में कार नहर में गिरने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत।
मई 2019 - सौंदा पुल के समीप कार गंगनहर में समाई। एक की मौत, दो को बचाया गया।
05 जून 2019 - तेज रफ्तार बाइक नहर में गिरी। एक की मौत, एक घायल।
01 फरवरी 2020-तेज रफ्तार एक्सयूवी गंगनहर में गिरी। चार छात्रों की मौत, दो को बचाया गया।
18 जुलाई को मसूरी नहर में पिता पुुत्र की मौत हो गई।
विधायक बोलीं, तेज स्पीड से होते हैं हादसे
स्पीड अधिक होना भी दुर्घटना का कारण बनता है। गंगनहर मार्ग की टूटी दीवारों की मरम्मत के लिए सिंचाई विभाग को पत्र लिखा गया है। मौखिक रूप से भी कई स्तर पर जानकारी दी गई है। -डॉ. मंजू सिवाच, विधायक, मोदीनगर
नहर से निकाली गई कार
मसूरी। शनिवार सुबह गंगनहर में गिरी विजयनगर निवासी यादव परिवार की वैगनआर कार को पुलिस ने रविवार को कई घंटो की कड़ी मशक्कत के बाद पानी से बाहर निकलवाया। घटनास्थल से लगभग 60-70 मीटर दूर कार बरामद की गई।