गाजियाबाद। मेरठ रोड स्थित डीपीएसजी में स्कूल का समय बढ़ाने को लेकर चल रहा गतिरोध अभी शांत नहीं हुआ है। बृहस्पतिवार को भी कुछ अभिभावक जिलाधिकारी से मिलने पहुंचे। हालांकि उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। पढ़ाई के घंटों में कोई बदलाव नहीं होने से अभिभावक दोबारा से आंदोलन तेज करने की रणनीति बना रहे हैं। साथ ही वह प्रशासन के रूखे रवैये से परेशान हैं।
एनएच-24 लैंडक्रॉफ्ट निवासी गौरव गुप्ता का कहना है कि उनके दो बच्चे डीपीएसजी में पढ़ते हैं। आंदोलन के बाद भी पढ़ाई के घंटों में बदलाव नहीं हुआ है। सुबह साढ़े सात बजे स्कूल पहुंचने के लिए बच्चों को सुबह 5 बजे उठना पड़ेगा।
नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क के तहत भी साढ़े पांच घंटे पढ़ाई अनिवार्य है। यहां तो सात घंटे पढ़ाई कराई जा रही है। दोबारा आंदोलन की रणनीति बनाई जा रही। शिकायत करने वाले पैरेंट्स को स्कूल से टीसी ले जाने के कहा जा रहा है। प्रशासन ने पूरे मुद्दे से जिस तरह से हाथ झाड़ लिया, इससे अभिभावक ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
मेरठ रोड नंदन विला निवासी अंकिता त्यागी का कहना है कि समय कम नहीं किया गया है। केवल सुबह साढ़े आठ को साढ़े सात कर दिया और 3.25 को 2.25 कर दिया तो समय तो नहीं घटाया है। केवल जल्दी कर दिया। वह कहती हैं कि जो लोग टीसी मांग रहे हैं, उनसे तीन महीने की फीस और पोर्टल पर अप्लाई के लिए कहा जा रहा है। समय बढ़ाने का उद्देश्य समझ नहीं आया। जल्द दोबारा आंदोलन होगा। राजनगर निवासी अभिभावक सौरभ कंसल कहते हैं कि डीएम और सिटी मजिस्ट्रेट से मिलने अभिभावक गए थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। वह कहते हैं कि अभिभावक मामला हल होने तक चुप नहीं बैठेंगे।
हमने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए समय बढ़ाया है। पढ़ाई केवल पांच घंटे 55 मिनट होगी। हर पीरियड के बाद पांच मिनट का रिफ्रेश ब्रेक और 25 मिनट का इंटरनलवेल है। टीसी देने वाली बात सरासर गलत है। अभिभावक हमारा परिवार है, समझाने पर वह वापस आ रहे हैं।
प्रीति वासन, प्रधानाचार्य डीपीएसजी
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इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन करेगा दिल्ली कूच
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- समाधान नहीं होने तक जारी रहेगा संघर्ष
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन ने अभिभावकों को न्याय नहीं मिलने पर दिल्ली कूच करने की चेतावनी दी है। इस संबंध में बृहस्पतिवार को जिला प्रशासन को पत्र भी सौंपा। इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा त्यागी का कहना है कि दिल्ली पब्लिक स्कूल, मेरठ रोड की ओर से आठ अप्रैल को समय बढ़ाने के लिए निकाला गया नोटिस अभिभावकों को भ्रमित करने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिसे पेरेंट्स भली भांति समझ गए हैं।
मीडिया प्रभारी विवेक का कहना है कि अलग-अलग कक्षाओं के लिए अलग से समय सारिणी जारी कर यह दिखाने का प्रयास किया जा रहा है कि समस्या का समाधान हो गया है, जबकि वास्तविक परेशानी वहीं की वहीं है। स्कूल के समय से बच्चों पर अतिरिक्त मानसिक व शारीरिक दबाव अब भी जस का तस बना हुआ है। उपाध्यक्ष विनय कक्कड़ का कहना है कि घंटों में कोई कमी नहीं की गई है। यह केवल दिखावे का आदेश है। सचिव महिपाल रावत और सुमित त्यागी ने कहा कि जब तक स्कूल प्रबंधन अपना फैसला पूरी तरह वापस नहीं लेता आंदोलन जारी रहेगा अन्यथा हम दिल्ली कूच करेंगे।