गाजियाबाद। जिला महिला अस्पताल में प्रसव कराने के लिए दो चिकित्सक और स्टाफ पर रिश्वत मांगने का आरोप लगा आशा कार्यकर्ताओं ने सीएमएस से शिकायत की है। सीएमएस को दिए शिकायती पत्र में 25 आशाओं ने आरोप लगाया है कि प्रति प्रसव पर चार से पांच हजार रुपये की मांग की जाती है। रुपये नहीं देने पर गर्भवती को रेफर करने का आरोप लगाया है जबकि अस्पताल में प्रसव कम होने पर सीएमओ ने गंभीरता से लेते हुए गर्भवती महिलाओं को रेफर करने पर रोक लगाई थी।
आशा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अस्पताल में कार्यरत दो महिला चिकित्सक किसी भी गर्भवती महिला को प्रसव कराने के लिए अस्पताल लाने पर तीन हजार रुपये की मांग करती हैं, इसके अलावा वार्ड आया और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी उनसे 500-500 रुपये की मांग करते हैं, जबकि फार्मासिस्ट भी 300 से 500 रुपये मांगते हैं। रुपये नहीं दिलाने पर उनके और गर्भवती महिला व उसके परिजनों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। सरकारी अस्पताल में प्रसव करवाने के लिए उनके द्वारा पहुंचाई जाने वाली प्रत्येक गर्भवती महिला के साथ ऐसा ही किया जाता है, जो महिलाएं गरीब होती हैं।
वह रुपये नहीं दे पाती हैं तो उनके साथ दुर्व्यवहार कर रेफर कर दिया जाता है। वार्ड आया और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी गाली-गलौज भी करती हैं। डॉक्टर और स्टाफ आशाओं के साथ भी बेहद अभद्र व्यवहार करते हैं। प्रसव के बाद अस्पताल से जाने के दौरान भी गेट पर तैनात होमगार्ड गर्भवती के परिजनों से रुपयों की मांग करते हैं और रुपये नहीं देने पर बाहर नहीं जाने देते।
सीएमओ कार्यालय का करेंगे घेराव
समाजवादी युवजन सभा के जिलाध्यक्ष जीतू शर्मा ने कहा कि लोगों ने शिकायत की थी कि महिला अस्पताल में गर्भवती से प्रसव में आने वाले खर्चे और जरूरी दवा और सामान के नाम पर पांच हजार से सात हजार रुपये की रिश्वत मांगी जाती है। इसमें डॉक्टर से लेकर अस्पताल का स्टॉफ तक शामिल होता है। सूचना के अधिकार के तहत मांगी जानकारी में बताया गया कि गर्भवती महिलाओं से कोई फीस नहीं ली जाती। जल्द ही समाजवादी युवजन सभा मुख्य चिकित्साधिकारी को ज्ञापन देगी। उसके बाद भी इनकी कार्यशैली में सुधार नहीं आया तो सीएमओ कार्यालय का घेराव भी किया जाएगा।
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अलका शर्मा का कहना है कि आशाओं की शिकायत के संबंध में जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।