मार्केट में काफी नकली नोट चलन में हैं। इसे देखते हुए मार्केट में 10 रुपये के सिक्कों को लेकर भी भ्रम की स्थिति फैल गई है। दुकानदारों का कहना है कि मार्केट में तेजी से 10 रुपये के नकली सिक्कों की खपत की जा रही है।
उनका तर्क है कि जिन सिक्कों के ऊपर रुपये का लोगो लगा है वह असली है। जबकि जिस सिक्के पर चिन्ह नहीं है वह नकली है। मुद्रा के जानकारों का कहना है कि यह भ्रम की स्थिति है। दोनों ही सिक्के असली हैं।
मार्केट में पहले सही 50, 100, 500 और 1000 रुपये के नकली नोट चलन में हैं। आरबीआई के मुताबिक कई हजार करोड़ रुपये की नकली करेंसी भारतीय बाजार में खपत की जा रही है। नकली करेंसी को देखते हुए मार्केट में 10 रुपये के सिक्के को लेकर भी भ्रम की स्थिति है।
सिक्कों के आकार और प्रतीक को लेकर व्यापारी इसे लेने में गुरेज कर रहे हैं। जबकि ऐसा नहीं है। 10 रुपये के सिक्कों के संबंध में बैंक अधिकारियों के मुताबिक जब से रुपये का चिन्ह बदला है तब से 10 रुपये के सिक्के पर रुपये का चिन्ह लगना शुरू हुआ।
पुराने सिक्कों पर ये चिन्ह नहीं मिलेगा। यही कारण है कि सिक्कों के दोनों प्रकारों में अंतर है। इसी वजह से लोगों और व्यापारियों में भ्रम है। आरबीआई द्वारा रुपये का चिन्ह 2010 के बाद लागू किया गया। इसलिए सिक्कों में अंतर है।