परमानेंट डीएल बनवाने के लिए अब आवेदकों को वर्चुअल ड्राइविंग टेस्ट देना होगा। इसमें आवेदक एक कंप्यूटराइज्ड इंस्ट्रूमेंटेशन मशीन में बैठकर ड्राइविंग टेस्ट देगा। जिस प्रकार रोड पर बैरियर या घुमावदार रास्ते बनाकर टेस्ट होता है, वैसा ही ट्रैक मशीन पर होगा।
आवेदक टेस्ट में फेल हुआ या पास यह मशीन ही निर्धारित करेगी। प्रदेश में फिलहाल गाजियाबाद और नोएडा में ही यह वर्चुअल ड्राइविंग टेस्ट होगा। परिवहन विभाग जनवरी से इसे शुरू करने की तैयारी में लगेगा।
वर्तमान में परमानेंट डीएल के लिए राइडिंग टेस्ट लेने की जगह परिवहन विभाग के पास नहीं है। इसलिए विभाग ने पुलिस प्रशासन के पास एक प्रार्थना पत्र दिया था, जिसमें पुलिस लाइन में एक ड्राइविंग ट्रैक बनाने का अनुरोध किया गया, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई निर्णय नहीं हुआ।
एआरटीओ (प्रशासन) विश्वजीत सिंह ने बताया कि राइडिंग टेस्ट के लिए अब विभाग हाईटेक तरीका अपनाएगा। इसमें आवेदक को वर्चुअल टेस्ट देना पड़ेगा। इसमें आवदेक एक रूम में कंप्यूटराइज्ड इंस्ट्रूमेंटेशन मशीन की सहायता से ये टेस्ट देगा।
टेस्ट में वह सभी आयाम लिए जाएंगे, जिसे विभाग भौतिक रूप से अब तक लेता आ रहा है। आवेदक मशीन में बैठेगा, जिस प्रकार वह वाहन में बैठता है। फिर कंप्यूटर स्क्रीन पर जो पिक्चर, गड्ढे, घुमावदार रोड, वाहन को आगे-पीछे करना यह सब वह बैठे-बैठे करेगा। अंत में मशीन ही आवेदक को फेल-पास करेगी। संभावना है कि जनवरी के दूसरे या तीसरे सप्ताह से यह टेस्ट शुरू हो जाएंगे।
सर्वर रहा ठप, नहीं बन सके डीएल
गाजियाबाद। परिवहन विभाग का बृहस्पतिवार को सर्वर ठप हो गया, जिसकी वजह से डीएल बनवाने आए लोगों को लौटना पड़ा। परिवहन विभाग में प्रतिदिन 250 से 300 डीएल बनते हैं। सुबह जब काउंटर खुले तो कंप्यूटर शुरू नहीं हो सके। मेन सर्वर रूम से भी काफी कोशिश की गई, लेकिन सर्वर दिन भर के लिए ठप हो गया।