दिवाली से पहले ट्रेनों में सीटें फुल हुईं तो दलालों की चांदी हो गई। फेस्टिवल सीजन में कंफर्म तत्काल टिकटों के लिए सुविधा शुल्क भी बढ़ गया है। पहले एक व्यक्ति के कंफर्म टिकट के लिए 300 रुपये वसूले जा रहे थे तो अब यह रकम बढ़कर 500 से 600 रुपये तक पहुंच गई है।
दलालों और उनसे टिकट खरीदने वालों की धरपकड़ के लिए रेलवे ने टीमें गठित की हैं। गाजियाबाद की कालोनियों में भी लोगों ने कंप्यूटर लगाकर टिकट बेचने का काम शुरू कर दिया है। दिनभर में 10-12 कंफर्म टिकट भी इन्होंने बुक करा दिए तो एक-एक टिकट सेंटर संचालक 4 से 6 हजार रुपये कमाई कर रहा है।
दलाल फर्जी आईडी से पहले ही टिकट बुक करा लेते हैं और फिर मुंह मांगी कीमत लेकर ग्राहकों को बेच देते हैं। ऐसे लोगों को पकड़ने के लिए रेलवे ने कई टीमें गठित की हैं। नार्दन रेलवे के पीआरओ कुलतार सिंह का कहना है कि अवैध तरीके से टिकट बेचने वाले दलालों और फर्जी आईडी पर बनाए गए टिकटों पर सफर करने वालों की धरपकड़ के लिए विजिलेंस टीमें, एंटी फ्रॉड स्क्वाएड, टीटीई और कामर्शियल विभाग की टीमें बनाई गई हैं।
यह टीमें ट्रेनों में भी चेकिंग कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि वह टिकट काउंटर्स या रेलवे से स्वीकृत टिकट सेंटर से ही रिजर्वेशन कराएं। फर्जी आईडी पर बने टिकट पर सफर करते पकड़े गए तो जुर्माना देना पड़ेगा।