अजनारा में बंदरों को भगाने के लिए छोड़ी गई पोटाश गंधक गन। स्रोत: वीडियोग्रैब
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की अजनारा इंटीग्रिटी सोसायटी में बंदर के बच्चे की मौत पर बवाल मचा है। इसमें दो पक्ष आमने-सामने हैं, जिन्होंने पुलिस में शिकायत दी है। पुलिस जांच कर रही है।
बुधवार को सोसायटी में बंदरों के आतंक के कारण सुरक्षा गार्डों ने गंधक पोटाश गन का इस्तेमाल किया था। निवासी आलोक का आरोप है कि गन के डर से बंदरिया का बच्चा पेड़ से गिरकर मर गया। आलोक ने बृहस्पतिवार को एओए टीम के खिलाफ पुलिस, पेटा और वन विभाग में शिकायत दी।
वहीं, एओए सचिव अरुणेश शर्मा ने आलोक के आरोपों को झूठा बताया है। अरुणेश शर्मा के अनुसार, आलोक पानी बेचने का काम करता है और पानी की गुणवत्ता जांचने के कारण उसने शिकायत की। एओए का कहना है कि बंदरिया का बच्चा पहले से मरा था। गन से केवल उसका मृत शरीर नीचे गिरा। उन्होंने बताया कि बंदर मृत शरीर सूखने तक उसे अपने साथ रखते हैं। एओए ने लोगों की मांग पर पोटाश के पटाखे केवल बंदरों को भगाने के लिए चलवाए थे। इससे किसी की मौत नहीं हुई।
नहीं हो सका पोस्टमार्टम, अधिकार क्षेत्र का विवाद
पुलिस ने बंदर का शव पोस्टमार्टम के लिए वन विभाग को दिया, पर देर शाम तक पोस्टमार्टम नहीं हो सका। राजनगर एक्सटेंशन के चौकी प्रभारी अनुज ग्रेवाल ने बताया कि बंदर का बच्चा तीन दिन पहले मर चुका था। शरीर क्षत-विक्षप्त होने से पोस्टमार्टम नहीं हो पा रहा है, फिर भी प्रयास जारी हैं। वन विभाग के इंस्पेक्टर नितिन सिंह ने भी पुष्टि की कि बंदर का बच्चा तीन दिन पहले मरा था। अब उसे केवल दफनाया जाएगा। नितिन सिंह ने बताया कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि मृत शरीर को कहां दें, क्योंकि वे पोस्टमार्टम नहीं कराते। वहीं, वन विभाग की रिंग ऑफिसर निम्मी कूचिया ने स्पष्ट किया कि बंदर उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। उन्होंने कहा कि यह काम नगर निगम का है।