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Ghaziabad News: जर्जर इमारत ने बढ़ाईं मुश्किलें, रेलिंग फांदकर लैब तक पहुंच रहे मरीज

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जिला अस्पताल में गेट बंद होने पर रैम्प की दीवार से कूदकर जाते मरीज। संवाद
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गाजियाबाद। एमएमजी अस्पताल की जर्जर इमारत अब मरीजों और अस्पताल प्रशासन दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। मंगलवार को सर्जिकल वार्ड के सामने गैलरी की छत से फिर प्लास्टर गिरने के बाद एहतियातन ब्लॉक ए और ब्लॉक बी को जोड़ने वाले रैंप व गैलरी को अलमारी लगाकर बंद कर दिया गया। इससे अस्पताल के भीतर आवाजाही प्रभावित हो गई। सबसे अधिक परेशानी खून की जांच कराने पहुंचे मरीजों को हुई। लैब तक पहुंचने का सीधा रास्ता बंद होने से कई मरीज और उनके तीमारदार रेलिंग और रैंप की दीवार फांदकर लैब तक पहुंचे।
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अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रभावित हिस्से में आवाजाही रोक दी है। पहले से बंद ब्लॉक ए और बी के मरीजों को डेंगू वार्ड और सर्जिकल वार्ड में शिफ्ट किया गया है। अब बढ़ते दबाव को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था भी शुरू कर दी गई है। नेत्र विभाग में अतिरिक्त बेड लगाए जा रहे हैं और प्रत्येक बेड तक बिजली की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पताल के सभागार को भी अस्थायी वार्ड में बदलने की तैयारी चल रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर वहां मरीजों को भर्ती किया जा सके।



अस्पताल में जांच सेवाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है। अल्ट्रासाउंड मशीन को प्राइवेट वार्ड या आरटीपीसीआर लैब में स्थानांतरित करने की कवायद शुरू हो गई है। वहीं, एक्सरे मशीन को भी शिफ्ट करने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन इसके लिए उपयुक्त स्थान नहीं मिल पाने से जल्द ही एक्सरे जांच प्रभावित होने की संभावना बनी हुई है।
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वर्ष 1956 में स्थापित एमएमजी अस्पताल जिले का सबसे पुराना और सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। 166 बेड क्षमता वाले इस अस्पताल में जर्जर भवन के कारण दो वार्ड पहले ही बंद किए जा चुके हैं। इससे अब केवल लगभग 80 बेड पर ही मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। बीते एक महीने से लगातार अलग-अलग हिस्सों में छत और दीवारों से प्लास्टर गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। कई बार मरीज और कर्मचारी बाल-बाल बच चुके हैं। अस्पताल भवन की स्थिति का आकलन करने के लिए मेरठ मंडल के अपर स्वास्थ्य निदेशक भी निरीक्षण कर चुके हैं।



अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि लगातार बारिश के दौरान भवन की स्थिति और अधिक जोखिमपूर्ण हो सकती है। मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए सभी आवश्यक वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि अल्ट्रासाउंड मशीन को स्थानांतरित करने की योजना पर काम चल रहा है, जबकि एक्सरे मशीन के लिए अभी उपयुक्त स्थान की तलाश जारी है। अस्पताल प्रशासन का प्रयास है कि उपचार और जांच सेवाएं न्यूनतम व्यवधान के साथ जारी रहें।
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जिला अस्पताल में गेट बंद होने पर रैम्प की दीवार से कूदकर जाते मरीज। संवाद

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