गाजियाबाद। कविनगर के महेंद्रा एंक्लेव में रहने वाले प्रॉपर्टी डीलर विनोद चौधरी (34) ने सोमवार की रात पत्नी दीपक चौधरी उर्फ दीपा (32) की हत्या करने के बाद आत्महत्या कर ली। मंगलवार सुबह साढ़े सात बजे पुलिस को दोनों के शव मधुबन बापूधाम क्षेत्र के कमला नेहरूनगर में नशा मुक्ति केंद्र के पास पड़े मिले। दीपक घुमाने के बहाने से पत्नी को कार से ले गया था। शव कार के बाहर पड़े थे।
प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस का कहना है कि विनोद ने यह कदम अवसाद की वजह से उठाया है। उसे गुर्दे और लिवर की बीमारी थी। इससे ही अवसाद में आ गया था। पत्नी अवसाद का इलाज करा रही थी। वह इसे सही नहीं मानता था। दोनों में कलह होने लगी। यही कलह काल बन गई।
विनोद के बच्चों ने पुलिस को बताया, पापा मम्मी से अक्सर कहते थे, तुम मुझे पागल घोषित कराना चाहती हो, लेकिन मैं ऐसा होने नहीं दूंगा। उन्होंने कई बार धमकी दी थी, मैं अब जीना नहीं चाहता, दुनिया से चला जाउंगा लेकिन तुम्हें साथ लेकर जाउंगा।
डीसीपी सिटी ज्ञानंजय सिंह ने बताया कि विनोद रात नौ बजे दीपा को लेकर घर से निकले थे। दोनों देर रात तक जब घर नहीं पहुंचे तो विनोद की बेटी ने पड़ोस में रहने वाले योगेंद्र को इसकी सूचना दी। योगेंद्र ने कविनगर थाने में काॅल की। पुलिस मोबाइल की लोकेशन के आधार पर उनकी तलाश कर रही थी। तभी विनोद के मोबाइल की घंटी सुनाई दी। उनका शव कार के एक तरफ पड़ा था। दूसरी और पत्नी का शव था। विनोद के शव के पास तमंचा पड़ा था। इसी से हत्या और आत्महत्या की गई। कार विनोद के बहनोई अचल सिंह के नाम पर है।
शाम ढलते ही बढ़ जाता था गुस्सा
इंटरनेट पर तलाश करते थे इलाज
राहुल सिंघल
गाजियाबाद। अवसाद में विनोद कई बार अजीब तरह का व्यवहार करते थे। परिवार के लोगों ने बताया कि वह दिन में सामान्य व्यवहार करते थे लेकिन शाम ढलते ही कई बार उनका गुस्सा बढ़ जाता था। वह बहकी-बहकी बातें करने लगते थे। इसी में उनका पत्नी दीपा से झगड़ा हो जाता था। कुछ दिन से वह आत्महत्या की धमकी दे रहे थे, लेकिन इसे किसी ने बहुत गंभीरता से नहीं लिया।
परिवार के लोगों का कहना है कि उन्हें लगता था कि अवसाद की वजह से ऐसा बोल रहे थे। अवसाद ठीक होगा तो इस तरह से बोलना भी बंद कर देंगे। उनका दो साल पहले गुर्दे की पथरी का ऑपरेशन हुआ था। इसके बाद लिवर की बीमारी का पता चला। उन्हें बीमारी का भय बैठ गया। इसी से वह अवसाद में आ गए। वह अपनी बीमारियों का उपचार इंटरनेट पर ढूंढते थे। उनकी बहन बीना ने पुलिस को बताया कि विनोद के लिए दिमाग शांत करने की दवा चिकित्सक ने दी थी। विनोद उन्हें नहीं खाते थे। वह उनकी बात मानते थे। अगर वह रुक जाती तो शायद वह दवाई खानी शुरू कर देते और यह नहीं होता।
कार के बाहर से
मारी पत्नी को गोली
(दोस्त ने दिया था तमंचा)
मौका ए वारदात का मुआयना करने के बाद डीसीपी ने बताया कि कार में ड्राइवर के दूसरी ओर के शीशे में गोली पार हो गई थी। विनोद ने दीपक को कार के बाहर से गोली मारी। यह पार होते हुए उनकी कनपटी पर लगी। दीपक गोली लगने के बाद कार से बाहर निकलीं, लेकिन वहीं पर गिर पड़ीं। इसके बाद विनोद कार के दूसरी ओर गए। वहां खुद को गोली मारी। उनका शव कार की दूसरी तरफ पड़ा मिला। बच्चों ने पुलिस को बताया कि कुछ दिन पहले ही पापा यह तमंचा दोस्त बिट्टू से लेकर आए थे। उन्होंने इसे दिखाकर कहा था कि वह सुसाइड करने की ठान चुके हैं। उन्हें अब कोई नहीं रोक सकता। विनोद की बहन बीना ने पुलिस को बताया कि भाई पहले भी आत्महत्या का प्रयास कर चुका था। उसे कई मनोचिकित्सकों को दिखाया, लेकिन उसकी तकलीफ दूर नहीं हुई। उसे मनोचिकित्सक के पास जाना अच्छा नहीं लगता था।
17 साल पहले हुई थी शादी
मोरना। भोकरहेड़ी निवासी किसान उदयवीर राणा की बेटी दीपक उर्फ दीपा व पति लिब्बरहेड़ी के मूल निवासी विनोद की मौत की सूचना से कस्बे में शोक छाया है। कस्बे के गण्यमान्य लोगों ने दीपक उर्फ दीपा के घर पहुंच कर परिजनों को सांत्वना दी। दीपक उर्फ दीपा की शादी 17 साल पहले लिब्बरहेड़ी निवासी विनोद के साथ हुई थी। उनके परिवार में बेटी शगुन (15) व बेटा शिवाय (8) है। विनोद ने अपने रिश्तेदार के साझे में मुजफ्फरनगर में कीटनाशक का व्यापार किया हुआ था। वर्तमान में वह गाजियाबाद में रहते थे। वह वहां पर एक कंपनी में नौकरी करते थे। कोरोना काल में कंपनी ने विनोद सहित कई कर्मचारियों का हिसाब कर दिया था। इसके बाद से विनोद मानसिक रूप से परेशान थे। कुछ समय से प्रॉपर्टी डीलिंग का काम कर रहे थे।