गाजियाबाद। पुराने महिला अस्पताल में संचालित जीरियाटिक (वृद्धावस्था) वार्ड का दंत चिकित्सा विभाग पिछले तीन महीनों से बंद पड़ा है। विभाग बंद होने से इलाज के लिए आने वाले बुजुर्ग मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दांतों से जुड़ी समस्याओं के लिए उन्हें या तो निजी क्लीनिकों का रुख करना पड़ रहा है या फिर बिना इलाज लौटना मजबूरी बन गया है।
जीरिएटिक वार्ड में तैनात एकमात्र डेंटल सर्जन डॉ. मोहिनी की ड्यूटी एमएमजी अस्पताल के दंत चिकित्सा विभाग में लगा दी गई है। इसके बाद से जीरियाटिक वार्ड का दंत विभाग पूरी तरह ठप हो गया है। जबकि यह विभाग विशेष रूप से बुजुर्ग मरीजों के लिए शुरू किया गया था, जहां उम्र से जुड़ी दंत समस्याओं का इलाज किया जाता था। एमएमजी अस्पताल की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। यहां पहले दो डेंटल सर्जन कार्यरत थीं। इनमें से एक डॉ. मीनाक्षी छह महीने के बच्चा देखभाल (सीसीएल) अवकाश पर हैं, जबकि संविदा पर कार्यरत दूसरी डेंटल सर्जन की सेवाएं समाप्त हो चुकी हैं। इस कारण एमएमजी अस्पताल में फिलहाल कोई स्थायी डेंटल सर्जन उपलब्ध नहीं है। इसी कमी को पूरा करने के लिए जीरियाटिक वार्ड से डॉ. मोहिनी को वहां भेजा गया है।
हालांकि एमएमजी अस्पताल में आईटीएस डेंटल कॉलेज के प्रशिक्षु दंत चिकित्सक मरीजों का इलाज कर रहे हैं, लेकिन प्रशिक्षु डॉक्टरों पर निर्भर व्यवस्था को लेकर मरीजों और उनके तीमारदारों में असंतोष है। उनका कहना है कि जटिल मामलों में अनुभवी चिकित्सक की जरूरत होती है, जो फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
केस: 1
विभाग बंद होने से खर्च करने पड़े रुपये
अर्थला निवासी 62 वर्षीय रामकिशोर पिछले दो महीनों से मसूड़ों में सूजन और दांत हिलने की समस्या से परेशान हैं। वे नियमित रूप से जीरिएटिक वार्ड के दंत विभाग में इलाज के लिए आते थे। विभाग बंद मिलने पर उन्हें निजी क्लीनिक में इलाज कराना पड़ा, जहां हजारों रुपये खर्च हो गए। रामकिशोर का कहना है कि बुजुर्गों की पेंशन और सीमित आमदनी में निजी इलाज कराना बेहद मुश्किल है।
केस: 2
एमएमजी में कई बार लगाना पड़ रहा चक्कर
नंदग्राम की 72 वर्षीय शांति देवी के दांत में दर्द और मुंह में सूजन हो गई थी। पहले उनका इलाज जीरिएटिक वार्ड में चल रहा था, लेकिन विभाग बंद होने के कारण प्रक्रिया अधूरी रह गई। एमएमजी अस्पताल जाने पर उन्हें प्रशिक्षु डॉक्टरों के पास भेजा गया, जहां उन्हें बार-बार आने की सलाह दी गई। शांति देवी का कहना है कि उम्र और कमजोरी के कारण बार बार अस्पताल आना उनके लिए कठिन हो गया है।
जीरिएटिक वार्ड के नोडल अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता का कहना है कि एमएमजी अस्पताल के सीएमएस के अनुरोध पर सीएमओ के निर्देश से डॉ. मोहिनी की ड्यूटी वहां लगाई गई है। उन्होंने बताया कि सोमवार को इस विषय में सीएमएस से बातचीत कर ड्यूटी वापस कराने का प्रयास किया जाएगा। वहीं, एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि जैसे ही डॉ. मीनाक्षी अवकाश से लौटेंगी, डॉ. मोहिनी को जीरिएटिक वार्ड में वापस भेज दिया जाएगा। फिलहाल दोनों अस्पतालों में दंत चिकित्सा सेवाएं चिकित्सकों की कमी से प्रभावित बनी हुई हैं।