गाजियाबाद। कोर्ट के आदेश के बाद दीपा भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि कोर्ट पर उन्हें पूरा विश्वास था कि उन्हें न्याय मिलेगा। भले ही 11 महीना लग गया लेकिन उन्हें न्याय मिला है। उन्होंने कहा कि छह जुलाई 2022 की रात उन्हें नहीं भूलती। रात करीब 10 बजे वह और उनके मंहत पति मोनू मंदिर परिसर में थे तभी लोनी बार्डर थाने से एसएचओ योगेंद्र पवार, उपनिरीक्षक विभांशु तोमर, मलखान सिंह, उप निरीक्षक प्रदीप शर्मा, अमर पाल सिंह, सिपाही राहुल, मुकेश, कुलदीप, कृष्ण कुमार व करीब 20 पुलिस वाले परिसर में घुस आए और उन्हें और उनके पति को अकारण पीटने लगे। उनके कपड़े फाड़ दिए और उनके गले से सोने का मंगल सूत्र तोड़ लिया। यहां तक उनकी छह साल की बच्ची वंशिका को भी पीटा। उनके पति माेनू को परिसर से पीटते हुए पुलिस चौकी ले गए। दीपा ने कहा कि उनके समझ में नहीं आ रहा था कि उन्हें और उनके परिवार को किस बात की सजा दी जा रही है।
हम जो चाहेंगे वहीं करेगी पुलिस
महंत मोनू की पत्नी दीपा ने अदालत में बयान दिया कि उनके पति मंदिर में आने वाले चढ़ावे से एकत्र होने वाली राशि को गरीब कन्याओं की शिक्षा और जरूरतमंदों के लिए दवाओं पर खर्च करते थे। पति की लोकप्रियता से मनीष भाटी, बल्ली, विकास ईर्ष्या रखते थे। रंगदारी के लिए दबाव बनाते थे। इसकी शिकायत थाने में की गई थी। दीपा ने आरोप लगाया कि ये तीनों क्षेत्रीय विधायक के गुर्गें हैं। तीनों धमकाते हुए कहते थे कि हम जो चाहेंगे पुलिस वहीं करेगी। पुलिस ने तीनों को पकड़ने के बजाय उन्हें और उनके पति को परेशान करने लगी।
इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के हुए हैं आदेश
योगेंद्र पवार एसएचओ
विभांशु तोमर उप निरीक्षक
मलखान सिंह उप निरीक्षक
प्रदीप शर्मा उप निरीक्षक
अमरपाल सिंह उप निरीक्षक
राहुल सिपाही
मुकेश सिपाही
कुलदीप सिपाही
अंकुश मलिक सिपाही
कृष्ण कुमार सिपाही
विजयपाल सिपाही
सुशील सिपाही
इसके अलावा 25 अज्ञात पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश अदालत ने दिए हैं।