गाजियाबाद। इंदिरापुरम के हस्तांतरण के लिए काउंटडाउन शुरू हो गया है। संयुक्त टीम का सर्वे भी लगभग पूरा हो चुका है। अधिकारियों का कहना है कि 15 दिन में फैसला आ जाने की उम्मीद है। 15 साल से नगर निगम में शामिल होने के लिए इंदिरापुरम के लोगों का सपना साकार होने की उम्मीद जग गई है।
जीडीए सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि सर्वे रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के लिए अगले हफ्ते बैठक होगी। उम्मीद है कि इसमें हस्तांतरण के लिए फाइनल मुहर लग जाएगी। सर्वे में सड़क, नाला, फुटपाथ, पार्क, जल निकासी के लिए जो भी काम अधूरे हैं, उन्हें पूरा कराया जाएगा।
छह लाख लोगों को होगा फायदा
इंदिरापुरम में करीब छह लाख लोग निवास करते हैं। नगर निगम यहां से करीब 18 करोड़ रुपये सालाना गृहकर लेता है। वहीं, जीडीए सीवर, वाटर, मेंटेनेंस और डेवलपमेंट चार्ज के नाम करीब 34 करोड़ रुपये सालाना ले रहा है। हस्तांतरण होने के बाद लोगों को दो विभागों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। पार्षद संजय सिंह का कहना है कि पिछले 15 साल से इंदिरापुरम निवासी हस्तांतरण के लिए संघर्ष कर रहे थे, अब उम्मीद जगी है।
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1222 एकड़ में बसी है कॉलोनी
1995 में इंदिरापुरम कॉलोनी बसना शुरू हो गई थी। प्राधिकरण की 1222 एकड में फैली इस कॉलोनी में एक लाख 72 मतदाता हैं। इंदिरापुरम को नगर निगम में शामिल करने के लिए 2011 से अब तक 19 बैठक हो चुकी है। कॉलोनी में नगर निगम के सात वार्ड है। इंदिरापुरम निवासी डीपी वर्मा का कहना है कि नगर निगम में शामिल होने के बाद विकास कार्य के लिए दो विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
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मुख्यमंत्री भी हस्तांतरण करने के लिए जीडीए को कर चुके हैं निर्देशित
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने भी इंदिरापुरम के हस्तांतरण का मुद्दा विधायक व मंत्री सुनील शर्मा उठा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने तत्कालीन जीडीए उपाध्यक्ष राकेश कुमार सिंह को जल्द से जल्द इंदिरापुरम को नगर निगम को देने के लिए कहा था। साथ ही यह भी कहा था कि जो काम अधूरे हैं, उसे पूरा कराने के बाद हस्तांतरण किया जाए।
टूटी सड़कों से मिलेगी निजात
इंदिरापुरम की अधिकांश सड़कें टूटी हैं। 24 साल पहले बनाए गए नाले आबादी बढ़ने के साथ जर्जर हो गए हैं। पार्क बदहाल हो गए हैं। अधिकांश पार्कों की दीवारें टूट गई हैं। पार्षदों का कहना है कि उन्हें जो फंड मिलता है वह अपने क्षेत्र में खर्च नहीं कर पाते हैं। हस्तांतरण के बाद फंड का इस्तेमाल कर सकेंगे और क्षेत्र का विकास तेजी से हो सकेगा।
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इस पर तैयार हो रही रिपोर्ट
इंदिरापुरम के हस्तांतरण के लिए जो कमेटी बनाई गई है वह कॉलोनी में संपत्ति की कीमत, जीडीए की कमाई, खर्च, पार्क, सड़कें, सीवरेज, ड्रेनेज, स्ट्रीट लाइट, कूड़ा निस्तारण केंद्रों की स्थिति, इन पर कितना खर्च होता, इन सबका आकलन करने के बाद संयुक्त टीम रिपोर्ट तैयार कर रही है।
जीडीए वीसी अतुल वत्स का कहना है कि पहले टीम ने भौतिक निरीक्षण किया इसके बाद ड्रोन से सर्वे कराया गया है। रिपोर्ट भी लगभग तैयार है। जल्द ही रिपोर्ट को लेकर एक संयुक्त बैठक की जाएगी। उम्मीद है कि इसी महीने हस्तांतरण हो जाएगा।
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक का कहना है कि हस्तांतरण के लिए सर्वे रिपोर्ट लगभग तैयार है। लगभग 15 दिन का समय और लगेगा।