गाजियाबाद। ‘पहाड़ खिसकने से पूरा रास्ता ही बंद हो गया था। अचानक आई आपदा में फंसे तो पास ही स्थित एक होटल में शरण ली, मगर वहां भी दो दिन का ही राशन था। इसके बाद दो दिन चिप्स और बिस्कुट खाकर गुजारे।’ यह कहना है गाजियाबाद के उन तीन छात्रों का जोकि माता वैष्णो देवी के दर्शन कर रामबन में पहाड़ों पर घूमने थे और चार दिनों तक पहाड़ों में ही फंसे रहे। अब सकुशल वहां से लौटकर आए हैं तो परिजनों ने होली-दिवाली एक साथ मनाने का फैसला किया है।
जीवन विहार निवासी धनीराम सिंह का पुत्र लक्ष्य कुमार अपने साथियों औरई निवासी आदित्य रावत और वाराणसी निवासी अभिषेक शाही के साथ वैष्णो देवी के दर्शन को गया था। ये तीनों गाजियाबाद के एकेजी कालेज से बीटेक कर रहे हैं। शालीमार गार्डन से गई स्पेशल वोल्वो बस से ये 13 मार्च को जम्मू पहुंचे थे। लक्ष्य ने बताया कि 16 मार्च को दर्शन करने के बाद पहाड़ों पर घूमने के लिए चले गए।
इनके साथ बुलंदशहर और मेरठ के चार युवक भी थे। सभी को 17 मार्च को पहाड़ पर स्थित रामबन के होटल से वापस लौटना था, लेकिन दोपहर में बारिश होने के बाद पहाड़ खिसककर सड़क पर आने से रास्ता बंद हो गया। इससे ये पहाड़ के होटल में ही फंस गए। लक्ष्य ने बताया कि पहाड़ पर चार दिन 21 मार्च तक होटल से बाहर नहीं आने दिया गया। वहां से नीचे आने का कोई साधन ही नहीं था।
19 मार्च को होटल में खाना भी खत्म हो गया, इसके बाद पानी की बोतल और बिस्कुट-चिप्स से ही गुजारा करना पड़ा। घर पर इनका संपर्क नहीं हो पा रहा था। धनीराम सिंह ने बताया कि परिवार में सभी का बुरा हाल था। लक्ष्य की माता कुसुम देवी और बहन नेहा का रो-रोकर बुरा हाल था।
रास्ता ठीक होने पर इनको सुरक्षा में नीचे लाया गया। परिजन इनको मंगलवार रात लेकर घर पहुंचे। अपनों के घर लौटने पर परिवार में खुशी का माहौल है। धनीराम सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार को घर पर आसपास के लोगों को भोजन पर बुलाया गया है। दिन में होली मनाने के बाद रात में दिवाली जैसी खुशी मनाई जाएगी।