कॉल करने पर जालसाज झांसे में लेते हैं और कंपनी के कर्मचारी द्वारा कॉल बैक करने की बात करते हैं। कंपनी के कर्मचारी के नाम पर साइबर ठग बातों में फंसाकर पेमेंट वापसी का लिंक भेजने की बात कहकर उसे डाउनलोड करने को कहते हैं।
इस लिंक के जरिए रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड हो जाता है। इसके बाद ठगों द्वारा एक आईडी भेजकर उसकी जानकारी ली जाती है। आईडी बताते ही ठग एप के जरिये मोबाइल का एक्सेस अपने हाथों में ले लेते हैं।
सोशल उकाउंट्स, व्हॅट्सएप व ईमेल अकाउंट हो सकते हैं हैक
साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक मोबाइल एक्सेस हाथ में आते ही साइबर ठग फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम आदि अकाउंट्स हैक कर सकते हैं। साथ ही फेसबुक, व्हॉट्सएप, टेलीग्राम अकाउंट्स के साथ भी छेड़छाड़ कर सकते हैं।
इतना ही नहीं, गूगल-पे, फोन-पे, पेटीएम आदि के इस्तेमाल कर खातों से रकम उड़ा सकते हैं। साथ ही मोबाइल में लिंक ईमेल आईडी हैक करके और गैलरी में मौजूद निजी डाटा चोरी करके उसका दुरुपयोग कर सकते हैं।
साइबर एक्सपर्ट कर्मवीर सिंह ने कहा कि इंटरनेट पर कस्टमर केयर का नंबर खोजते समय पूरी जांच-पड़ताल कर लें। अगर कस्टमर केयर पर कॉल करने पर एप का लिंक भेजा जाता है तो उसे किसी सूरत में डाउनलोड न करें। यहां तक कि किसी भी अनजान लिंक को क्लिक न करें। जालसाज रिमोट एक्सेस एप के जरिये आपका मोबाइल हैक कर सकते हैं।
साइबर एक्सपर्ट कामाक्षी शर्मा ने बताया कि अगर किसी एप को डाउनलोड करने के लिए कहा जा रहा है तो उसे बिल्कुल डाउनलोड न करें। तमाम रिमोट एक्सेस एप का इस्तेमाल साइबर जालसाजों द्वारा किया जा रहा है। अगर एप डाउनलोड कर भी ली है तो उसका कोई पासकोर्ड आदि किसी भी सूरत में शेयर न करें। ऐसा करने पर आपके मोबाइल का एक्सेस जालसाजों के पास जा सकता है।