गाजियाबाद। नोटबंदी के दौरान जनपद में धड़ल्ले से फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों रुपये खपाए गए। जिला उद्योग केंद्र की वेबसाइट पर पिछले वित्तीय वर्ष में 4715 फैक्ट्रियों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट लिया था, जिनमें से 400 फैक्ट्रियों के पंजीकरण नवंबर और दिसंबर माह में हुए थे।
अब आयकर विभाग इन फैक्ट्रियों की कुंडली खंगालने में लग गया है। जिला उद्योग केंद्र की वेबसाइट पर फैक्ट्रियों के रजिस्ट्रेशन के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू करने का उद्देश्य पारदर्शिता लाना था लेकिन इसका दुरुपयोग किया गया।
आवेदक फैक्ट्री के रजिस्ट्रेशन के लिए किसी भी पते पर आवेदन कर सकता है। फार्म भरने के बाद उसे आसानी से फैक्ट्री रजिस्ट्रेशन का सर्टिफिकेट मिल जाता है। एक बार सर्टिफिकेट मिलने पर बाकी विभागों से एनओसी मिलने में आसानी हो जाती है।
सूत्रों के अनुसार नोटबंदी के दौरान काफी संख्या में उद्योग केंद्र की वेबसाइट पर फैक्ट्रियों के रजिस्ट्रेशन कराए गए। आंकड़ों के मुताबिक अकेले नवंबर व दिसंबर माह में ही 400 से ज्यादा फैक्ट्रियों के पंजीकरण हुए जबकि हकीकत में कम ही फैक्ट्री लगी पाई गईं। ज्यादातर फैक्ट्री तो कागजों में ही चल रहीं हैं, जिसका फायदा नोटबंदी के दौरान उठाया गया। कागजों में चलने वाली फैक्ट्रियों के नाम पर करोड़ों रुपये इधर-उधर किए गए।
अब तक 7268 फैक्ट्रियों का हो चुका है रजिस्ट्रेशन
उद्योग केंद्र के आंकड़ाें की बात करें तो बीते 15 माह के दौरान ही गाजियाबाद में 7268 नई फैक्ट्रियों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। इसमें कितनी फैक्ट्रियां जमीनी स्तर पर संचालित है, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं हैं।
बोले अधिकारी
आयकर विभाग के डिप्टी डायरेक्टर इनवेस्टीगेशन प्रद्युम्न सिंह के मुताबिक यदि ऐसा हुआ है तो संबंधित विभाग से जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी। फर्जीवाड़ा मिलने पर टैक्स की रिकवरी की जाएगी।