ईश्वर त्यागी हत्याकांड का आरोपी एवं आईपीएस अफसर का छोटा भाई हथियार चलाने का शौकीन है। वह कई बार फायरिंग कर चुका है। वह घर में मौजूद सभी हथियारों और दोस्तों के हथियारों से भी हवाई फायर कर देता था। इससे परिवार के लोग अक्सर डर जाते थे। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है।
उधर, इस सनसनीखेज एवं हाई प्रोफाइल हत्याकांड में चार दिनों बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं।जानकारी के मुताबिक अनुज उर्फ डब्बू को हथियार चलाने का शौक है। करीब दो साल पहले वह गाजियाबाद के पूर्व विधायक नरेंद्र शिशौदिया के घर के बाहर भी फयरिंग कर चुका है।
पूर्व विधायक ने उसके खिलाफ कविनगर थाने में शिकायत भी की थी, मगर बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था। आरोपी अनुज ने इसके बाद कविनगर स्थित एक हथियार की दुकान के बाहर भी हवाई फायर किया था। इसके बाद भी परिवार ने उसे बचाते हुए समझौता करा दिया था।
राजनगर स्थित सेंट्रल पार्क में भी आरोपी हवाई फायर कर चुका है। उस समय वहां काफी बच्चे खेल रहे थे। गनीमत यह रही कि गोली किसी बच्चे को नहीं लगी। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में भी रखा था, लेकिन उनके पिता ईश्वर त्यागी ने लोगों से माफी मांगकर आरोपी अनुज को पुलिस की कार्रवाई से बचा लिया था।
फरार आरोपी अनुज उर्फ डब्बू के बडे़ भाई प्रवीण ने बताया कि अगर उन्हें पता होता कि अनुज आगे चलकर उनके पिता की हत्या कर देगा तो वह कभी उसे नहीं बचाते, बल्कि उसे जेल में बंद कराने में पुलिस की मदद करते।
एसएचओ कविनगर हेमंत राय का कहना है कि आरोपी की तलाश में दिल्ली समेत कई राज्यों में दबिश दी जा रही है। बता दें कि बृहस्पतिवार तड़के आईपीएस अफसर संजीव त्यागी के पिता ईश्वर चंद त्यागी निवासी राजनगर सेक्टर-2/236 की उन्हीं के बेटे अनुज उर्फ डब्बू ने सिर में गोली मारकर हत्या कर दी थी।
आखिर कहां से आते थे आरोपी के पास अवैध हथियार
भाई कुलदीप ने बताया कि आरोपी अनुज के पास कई ऐसे हथियार थे, जिन्हें उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अनुज के पास कई अवैध हथियार भी थे, जिन्हें वह भाई संजीव त्यागी के डर से छिपाकर रखता था।
ऐसे में एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि एक आईपीएस के भाई के पास आखिर कहां से अवैध हथियार आए।
साइलेंसर लगाकर हथियार से चलाई थी गोली
भाई प्रवीण ने बताया कि उनके आरोपी भाई अनुज ने उनके पिता को मारने के लिए अपने हथियार में साइलेंसर लगा लिया था, जिससे घर में किसी को गोली की आवाज सुनाई नहीं दें।
उन्होंने बताया कि वह त्योहार के समय पर इस तरह के हथियारों को उन्हें दिखाता था, जिनमें साइलेंसर लगे होते थे। यह बात भी दीगर है कि आखिर उसके पास साइलेंसर कहां से आया था।