बसपा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे अंटू मिश्रा और उनके माता-पिता को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ ने घोटाले का कुल 50 फीसद यानी 13.5 करोड़ रुपये जमा करने पर अंटू और उनके माता-पिता को गिरफ्तार किए जाने पर रोक लगा दी है। बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की कापी गाजियाबाद सीबीआई विशेष कोर्ट में दाखिल कर दी है।
एनआरएचएम घोटाले में अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा के खिलाफ सीबीआई ने 21 जुलाई को चार्जशीट विशेष कोर्ट में दाखिल की थी। इसमें अंटू मिश्रा के साथ ही उनके पिता दिनेशचंद्र मिश्रा और माता विमला मिश्रा का भी नाम था।
सीबीआई का आरोप था कि कैबिनेट मंत्री पद पर रहते हुए अंटू ने दवा कारोबारियों से 15-20 लाख रुपये की रिश्वत लेकर सीएमओ और परिवार कल्याण के पदों की बंदरबांट की थी। ट्रांसफर-पोस्टिंग का यह खेल इसलिए खेला गया, जिससे दवा कारोबारी एनआरएचएम के तहत मनमाने रेट पर दवा और मेडिकल उपकरण सरकारी अस्पतालों में सप्लाई करने का ठेका हासिल कर सकें।
सीबीआई का आरोप है कि 2007 से लेकर 2011 तक अंटू मिश्रा ने इस तरह से करीब 27 करोड़ रुपये हासिल किए। 27 करोड़ की इस काली कमाई को अंटू मिश्रा ने अपने माता-पिता के नाम सिर्फ कागजों पर ही बनाई गई फर्जी कंपनियों के माध्यम से ‘व्हाइट मनी’ में बदला था।
सीबीआई की इस चार्जशीट पर सीबीआई विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने 23 अगस्त को संज्ञान लेते हुए तीनों के एनबीडब्ल्यू जारी किए थे और 23 सितंबर तक कोर्ट में पेश होनेे का आदेश दिया था। लेकिन कोई भी पेश नहीं हुए।
इसके बाद कोर्ट ने 23 सितंबर को सीआरपीसी-82 के तहत कार्यवाही किए जाने के आदेश दिए थे। तभी से अंटू और उनके माता-पिता की परेशानी बढ़ गई थी। अंटू ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई थी।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अनिल आर. दवे और जस्टिस एएम खानविल्कर की खंडपीठ ने 21 अक्तूबर को घोटाले की कुल रकम में से 50 फीसदी रकम 13.5 करोड़ रुपये जमा कराने पर आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।