पुलिस ने निर्माणाधीन डासना बिजलीघर में हुई डकैती के मामले में पांच लुटेरों को गिरफ्तार किया है। उनसे लूटे गए बिजली के तार के17 बंडल, कैंटर, एक मोबाइल, दो तमंचे और दो कारतूस मिले हैं। सरगना समेत तीन साथी फरार हैं। सरगना ने लुटेरों को ‘सैलरी’ पर रखा हुआ था।
एसपी रूरल राकेश पांडेय ने बताया कि पकड़े गए लुटेरे साबू निवासी पिलखुवा, इरशाद उर्फ भूरा निवासी लिसाड़ी गेट मेरठ, सोनू निवासी फेस-दो गौतमबुद्धनगर, मोहित निवासी गुलावठी बुलंदशहर और हेमंत उर्फ मुनीम निवासी खानपुर, बुलंदशहर के रहने वाले हैं।
इन्हें नाहल झाल से शनिवार रात तब दबोचा गया, जब यह लूटे गए सामान को चोरी के कैंटर में भर रहे थे। कैंटर पर जेसीबी का नंबर लिखा था। हेमंत और इरशाद पहले भी जेल जा चुके थे।
सब्जी बेचने के बहाने दिन में करते थे रेकी
एसपी रूरल ने बताया कि गैंग लीडर मुकीम सीलमपुर दिल्ली का है। वह कबाड़ी है। लुटेरों को तीन से चार हजार रुपये महीना देता था। पकड़े जाने पर जमानत कराने और परिवार का खर्च उठाने की जिम्मेदारी भी मुकीम की थी।
इसके अलावा दो लाख या उससे ज्यादा का माल लूटकर लाने पर 8-10 हजार रुपये तक देता था। लुटेरे ठेली पर सब्जी बेचने या मजदूरी के बहाने दिन में रेकी करते थे और रात में वारदात को अंजाम देते थे। पुलिस से बचने के लिए मोबाइल पर बात नहीं करते थे, बल्कि मिस्ड कॉल का कोड वर्ड बना रखा था।
एक समय में तीन मिस्ड कॉल करने पर तय जगह पर सभी को मिलना था और चार मिस्ड कॉल खतरे का सिग्नल था। हालांकि यह गैंग लूटे गए मोबाइल से कॉल करने में ही पकड़ा गया। पुलिस ने सर्विलांस के जरिए उन्हें ट्रेस किया।
यह था मामला
31 मार्च की रात डासना के निर्माणाधीन बिजलीघर में 10 लोगों को बंधक बनाकर डकैती डाली गई थी। बदमाश आठ लाख के तार, 70 हजार रुपये और 10 मोबाइल लूटकर ले गए थे। हालांकि लुटेरों का कहना है कि उन्होंने 70 नहीं 18 हजार रुपये लूटे थे। रिपोर्ट चोरी की धारा में दर्ज की थी। अमर उजाला में डकैती की खबर छपने के बाद अगले दिन इसे डकैती की धारा में दर्ज किया गया था।