रेप के बाद आत्मदाह करने वाली दलित किशोरी के मामले में शनिवार को परिजनों ने एसएसपी कार्यालय पर हंगामा किया। आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष उन पर केस वापस लेने का दबाव बनवा रहा है, ऐसा न करने पर शनिवार को गांव के पूर्व प्रधान ने उनकी पिटाई की।
पुलिस ने पूर्व प्रधान पर एससीएसटी एक्ट और मारपीट की एफआईआर दर्ज कर ली। दूसरी तरफ, गांव जाकर परिवार के समर्थन में आए कुछ लोगों ने जुल्म से परेशान बताकर धर्मपरिवर्तन करने की भी बात कही।
किशोरी के पिता ने बताया कि शनिवार सुबह सवा आठ बजे वह घर के बाहर शोक सभा में बैठे थे, इस दौरान गांव का पूर्व प्रधान लीले आया। उसने शोक सभा में बैठे एक व्यक्ति गोपाल को बुलाया और उसे थप्पड़ मारे।
किशोरी के पिता का दावा है कि पूर्व प्रधान ने उनसे केस वापस लेकर फैसला करने को कहा, विरोध जताने पर लाठी से पीटा और गाली गलौज कर जातिसूचक शब्द कहे। फैसला न करने पर जान से मारने की धमकी दी। लोगों ने उन्हें बचाया।
इसके बाद किशोरी के पिता और परिवार के अन्य सदस्य गांववालों के साथ एसएसपी ऑफिस पहुंचे और हंगामा कर धरना देने की कोशिश करने लगे। एसएसपी की अनुपस्थिति में पुलिस अधिकारियों ने उनका शिकायती पत्र लिया और कार्रवाई का आश्वासन दिया।
सीओ द्वितीय मनीष मिश्रा ने बताया कि आरोपी लीले प्रधान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है, अन्य लोगों के नाम तहरीर में नहीं है। उधर, घटना के बाद दलित किशोरी के परिवार के समर्थन में आए कुछ जाटव और वाल्मीकि समाज के लोगों का दावा है कि अगर इस तरह से अत्याचार होता रहा तो वह धर्मपरिवर्तन करने को मजबूर होंगे। हालांकि किशोरी के परिजनों का कहना है कि वह धर्मपरिवर्तन नहीं करना चाहते हैं ,वह आरोपी के खिलाफ कार्रवाई चाहते हैं।
लीले प्रधान पर पहले भी पिटाई करने का आरोप
आरोप है कि तीन दिन पहले भी पूर्व प्रधान लीले ने गांव में रहने वाले युवक की पिटाई की थी। एसएसपी ऑफिस पर प्रदर्शन करने आए लोगों का दावा है कि लीले का आरोपी पक्ष से पारिवारिक रिश्ते हैं।
यह है मामला
29 मार्च को बम्हैटा गांव में एक दलित किशोरी से एमबीए स्टूडेंट ने रेप किया था। इससे आहत होकर किशोरी ने आत्मदाह कर लिया था। नौ दिन बाद उपचार के दौरान सफदरजंग अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में दो लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस ने उन्हें जेल भेज दिया था।