कविनगर पुलिस ने ‘जहरीली’ शराब बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि सरगना समेत दो भागे हुए हैं। यह फैक्ट्री कविनगर औद्योगिक क्षेत्र में चल रही थी, जिसमें रेक्टिफाइड केमिकल (स्प्रिट) और यूरिया मिलाकर नकली शराब बनाई जा रही थी।
एसपी सिटी सलमान ताज ने बताया कि पकड़े गए आरोपी बृजेश यादव निवासी बिसरख, गौतमबुद्धनगर, मुशाहिद उर्फ छोटू निवासी सैदनगरी, अमरोहा और मुकेश उर्फ टीटू निवासी सिकंदराबाद हैं।
फैक्ट्री को सीज कर इनसे 55 पेटी नकली तैयार शराब हरियाणा मार्का, 4 ड्रम और 5 लीटर रेक्टिफाइड केमिक, 2 किलो यूरिया, 40 खाली बंडल, 25 बोरी खाली पव्वे, 784 रेपर बेस्टो व्हिस्की, ढक्कन लगाने की मशीन, ट्रक और कार आदि बरामद की गई है। गैंग लीडर राजेश यादव निवासी कविनगर और उसका साथी कृष्णा निवासी बिसरख, गौतमबुद्धनगर भागे हुए हैं।
एसपी सिटी ने बताया कि इस गैंग के दो सदस्यों को 8 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। यह गैंग नकली शराब तैयार कर बेचता है। बरामद की गई शराब की जल्द ही आसपास के जिलों में तस्करी की जानी थी। केमिकल फैक्ट्री से केमिकल ले जाने वाले ट्रक चालकों से इनके संपर्क थे।
वह उनसे केमिकल खरीद लेते थे, जिससे नकली शराब बनाते थे। बता दें कि हापुड़ जिले में 2010 नकली शराब पीने से 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। गाजियाबाद में भी कई जगह महिलाएं शराब से मौत होने का दावा कर हंगामा कर चुकी हैं।
शराब नकली, बोतल असली
नकली शराब क ो असली शराब की बोतल में भरकर बेचते थे। असली समझकर कम कीमत में लोग खरीद लेते थे। आरोपियों से कई नामी कंपनियों की शराब की बोतल मिली हैं।
ऐसे तैयार होती थी शराब
रेक्टिफाइड केमिकल और यूरिया मिलाकर ‘जहरीली’ शराब तैयार की जा रही थी। कविनगर एसएचओ ने बताया कि एक लीटर स्प्रिट में करीब 83 फीसदी अल्कोहल होता है, जबकि सरकारी दुकानों में बिकने वाली देसी शराब में इसकी मात्रा सिर्फ 28 फीसदी होती है।
नकली शराब बनाने वाले एक लीटर रेक्टिफाइड केमिकल से तीन लीटर शराब तैयार करते हैं। शराब तैयार करने के दौरान स्प्रिट की मात्रा बढ़ जाने पर पीने वाले की जान जा सकती है। इस शराब का नियमित सेवन करने से शरीर के अंगों (किडनी, लीवर, आंतों) पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जो मौत का कारण बन सकता है।