पुलिस रेस्पांस व्हीकल (पीआरवी) पर सारी कॉल्स नहीं लग पा रही हैं। करीब 15 से 20 प्रतिशत कॉल्स ऐसी हैं, जो या तो लगती नहीं हैं या फिर लगने के बाद किसी दूसरे थाना क्षेत्र में तैनात पीआरवी को इसकी सूचना दे दी जा रही है। इससे पीआरवी समय से नहीं पहुंच पा रही है।
गाजियाबाद से हर रोज करीब 300 से 350 शिकायतें पीआरवी पर लखनऊ में जाती हैं, इनमें से काफी कॉल्स ऐसी रह जाती हैं तो कनेक्ट नहीं हो पाती हैं। शुक्रवार को ही शास्त्रीनगर में कंपनी डायरेक्टर महिला आशु ने कई बार पीआरवी को कॉल किया, मगर कॉल कनेक्ट नहीं हुई। इससे पहले नेहरूनगर में एक युवती चेन स्नैचिंग के बाद पीआरवी को सूचना
नहीं दे पाई थी। इस तरह की शिकायतें लगातार प्रकाश में आ रही हैं। पिछले दिनों आईजी मेरठ जोन से भी इस संबंध में पूछा गया था। उनका कहना था कि कुछ तकनीकी कारणों से यह दिक्कत आ रही है, इसकी सूचना लखनऊ भेज दी गई है, जल्द ही इसका निस्तारण कर दिया जाएगा।
दूसरी तरफ, सिटी कंट्रोल रूम के प्रभारी अनिल पांडे का कहना है कि कंट्रोल रूम में पांच लैंडलाइन नंबर लगे हैं। इन नंबरों को भी प्रचारित किया जाएगा, ताकि अगर 100 नंबर पर कॉल न लगे तो इन नंबरों पर संपर्क किया जा सके।