बैंक और एटीएम की सुरक्षा डंडे के सहारे की जा रही है। कई एटीएम पर तो गार्ड भी नहीं हैं। जिन इक्का-दुक्का गार्डों के पास बंदूक है भी, उन्हें चलाएं हुए बरसों हो गए हैं। अधिकांश बैंकों के बाहर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। सोमवार को पुलिस अफसरों ने बैंकों की सुरक्षा व्यवस्था जांचने के लिए औचक निरीक्षण किया तो पोल खुल गई।
सीओ द्वितीय मनीष मिश्रा ने बताया कि उन्होंने कविनगर और सिहानी गेट के दोनों एसएचओ के साथ राकेश मार्ग, आरडीसी, कविनगर और गांधीनगर में मुथूट फाइनेंस ऑफिस, सिंडिकेट बैंक, यूको बैंक, स्टेट बैंक समेत 12 बैंक शाखाओं में सुरक्षा व्यवस्था जायजा लिया।
सीओ ने बताया कि उन्होंने निर्देश दिए हैं कि सीसीटीवी कैमरे अच्छी क्वालिटी के हों और शाखा के एंट्री प्वाइंट पर भी लगे हों। बैंकों के बाहर सिक्योरिटी गार्ड हथियार लेकर ड्यूटी करें। सिक्योरिटी लॉकिंग सिस्टम ट्रेडिशनल न होकर, मॉडर्न होना चाहिए। बैंकों के बाथरूम में भी सायरन का बटन लगा हो। अग्निशमन उपकरणों का नवीनीकरण जल्द कराएं।
सिक्योरिटी गार्ड ने चलाई पांच साल बाद गोली
सिंडिकेट बैंक में तैनात सिक्योरिटी गार्ड हरीश चंद लंबे समय से बैंक में कार्यरत हैं, चेकिंग के दौरान सीओ द्वितीय ने उनकी बंदूक की गोलियां चेक की तो वह लाल से काले रंग में बदल गई थी, पूछने पर हरीश चंद ने बताया कि पांच साल से गोली नहीं चलाई।
सीओ ने गार्ड से फायरिंग करवाकर यह चेक किया कि जरूरत पड़ने पर वह गोली चला सकता है या नहीं। सीओ के सामने हरीश चंद ने फायरिंग की तो वह संतुष्ट हुए।
अलार्म के बटन का स्थान भी नहीं बता पाए अफसर
बैंकों में सुरक्षा व्यवस्था के उपकरण लगे होेने के बावजूद अफ सरों को यह जानकारी नहीं है कि उनका स्विच किस स्थान पर लगाया गया है। निरीक्षण के वक्त स्टेट बैंक के मैनेजर से जब अलार्म स्विच के बारे में सीओ ने सवाल किया तो वह जवाब नहीं दे सके। बैक अफसर ने सिक्योरिटी गार्ड को बुलाकर इसकी जानकारी मांगी।
सिक्योरिटी गार्ड के हाथ में मिला डंडा
स्टेट बैंक में सिक्योरिटी गार्ड हाथ में डंडा लेकर ड्यूटी कर रहे थे। यह देख सीओ ने उनसे सवाल किया कि असलाहधारी बदमाशों का सामना डंडे से कर सकोगे तो सिक्योरिटी गार्ड ने इंकार किया। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि बैंक में एक भी सिक्योरिटी गार्ड असलाहधारी नहीं है।