क्राइम ब्रांच ने अंतर्राष्ट्रीय वाहन चोर-लुटेरे गैंग के पांच बदमाशों को गिरफ्तार कर इनके पास से 20 लग्जरी कारें और चोरी करने के औजार बरामद किए हैं। यह गैंग दिल्ली-एनसीआर के अलावा नेपाल, त्रिपुरा और म्यांमार भी चोरी के वाहनों की सप्लाई करता था। सरगना समेत गैंग से जुड़े कई चोर अभी फरार हैं।
पकड़े गए वाहन चोरों में गुलफाम खरखौदा, मेराज अल्ताफ चौक और मोहसिन फलावदा मेरठ के हैं, जबकि नईम सासनी गेट और असद उर्फ आशू बन्ना देवी अलीगढ़ के हैं। इन्हें क्राइम ब्रांच प्रभारी सुरेश चंद बेलवाल की टीम ने एक सूचना पर करहेडा कट राजनगर एक्सटेंशन से गिरफ्तार किया है।
कबाड़ी का काम करने वाले इन चोरों से बरामद की गईं कारों में होंडा सिटी, इनोवा, स्कॉर्पियो, बुलेरो और हुंडई इयोन आदि हैं, जिनकी कीमत एक करोड़ से भी ज्यादा है।एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि गैंग लीडर और अन्य बड़े वाहन चोर अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं।
पकड़े गए इन चोरों को भी रिमांड पर लेकर भी पूछताछ की जाएगी। पुलिस पिछले 10 सालों के दौरान वाहन चोरी में पकड़े गए आरोपियों का ब्योरा खंगाल रही है। बीट कांस्टेबल को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। एसएसपी ने पुलिस टीम को 10 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।
नीलाम-एक्सीडेंटल वाहनों के नंबरों से करते थे गोरखधंधा
वाहन चोर गाजियाबाद, नोएडा, दिल्ली आदि स्थानों से कारों के लॉक पर मैगनेट लगाकर ड्रिल मशीन से लॉक तोड़कर चोरी कर लेते थे। फिर ईसीएम प्लेट और लॉक लगाकर कॉम्बिनेशन कर चोरी के वाहनों को मेरठ ले जाकर नीलाम और एक्सीडेंटल वाहन खरीदने कबाड़ी साथियों के साथ उनके गोदाम में इनके इंजन और चेसिस नंबर बदल देते थे।
जो नंबर डाले जाते थे, वह या तो नीलाम वाहनों के होते थे या एक्सीडेंटल वाहनों के। चोरी के वाहनों पर एक नंबर की डैमेज कारों के नंबर और डॉक्यूमेंट लगाकर उन्हें देश के विभिन्न राज्यों और नेपाल व म्यांमार आदि देशों में बेचते थे। खरीदार इन्हें सेकेंड हैंड ओरिजनल गाड़ी ही समझते थे। 8-10 लाख की कार को 5-6 लाख रुपये तक में बेच देते थे।
बेचने के लिए सोशल मीडिया से लेकर समाचार पत्रों तक में इनका प्रचार-प्रसार करते थे। गैंग के पास लॉक तोड़ने, ईसीएम प्लेट व लॉक लगाकर कॉम्बिनेशन करने वाला, शीशा तोड़कर वाहन चोरी करने वाला, इंजन, चेसिस नंबर बदलने वाले स्पेशलाइज्ड सदस्य हैं। फोरेंसिक टीम कारों केओरिजनल नंबरों का पता केस को मजबूत करने का काम कर रही है।
नोटबंदी का असर: खपा नहीं पा रहे थे चोरी के वाहन
इस गैंग को दबोचने में नोटबंदी की भूमिका भी प्रकाश में आ रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि चोरी के वाहनों की खरीद-फरोख्त का धंधा कैश से होता है। नोटबंदी के कारण कैश की किल्लत चल रही है, जिस कारण चोरों को वाहन खपाने में दिक्कत आ रही थी।
वे चोरी के 20 वाहनों के खपाने की जुगत भिड़ा रहे थे, इसी दौरान पुलिस मुखबिर ने इनकी गतिविधियों की सूचना दे दी और इन्हें दबोच लिया गया। दूसरी तरफ, एसएसपी का कहना है कि नोटबंदी के कारण इन्हें दबोचा गया है, इसे पुख्ता तौर पर तो नहीं कहा जा सकता है, मगर बिना पूरी पड़ताल के इससे इंकार भी नहीं किया जा सकता है।
सफेदपोशों को भी बेचते थे सेकेंड हैंड लग्जरी वाहनवाहन चोर सफेदपोशों को भी सेकेंड हैंड लग्जरी वाहन बेचते थे। बता दें कि अलीगढ़ के बीजेपी नेता को पूछताछ के लिए पुलिस ने हिरासत में लिया था, बाद में उनकी भूमिका न होने के कारण उन्हें छोड़ दिया गया था।