2500 करोड़ के सालाना बजट वाले जीडीए का आजकल ‘हाथ तंग’ चल रहा है। प्राधिकरण के वित्त सचिव ने अधिकारियों को दी जाने वाली कई सुविधाओं की मद में कटौती कर दी है। अब न तो अधिकारियों की टेबल पर प्रतिदिन फूलों का गुलदस्ता सजेगा और न ही वह सरकारी स्तर पर अपने लिए जलपान की व्यवस्था कर सकेंगे।
फजूलखर्ची और कमीशनबाजी के चलते जीडीए चर्चाओं में रहा है। वर्तमान में भी जीडीए में आउट सोर्सिंग के जरिए करीब 70 कंप्यूटर ऑपरेटर काम करते हैं। इसके लिए जीडीए से संबंधित ठेका फर्म के मालिक को 9 से 10 लाख रुपये मासिक का भुगतान किया जाता है।
जीडीए अपने बाबुओं के लिए दो बार कंप्यूटर ऑपरेरिंग ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित करा चुका है, मगर आज भी आउट सोर्सिंग कंप्यूटर ऑपरेटर्स से काम चलाया जा रहा है।इन्हीं खर्च का ही नतीजा रहा कि अब जीडीए का ‘हाथ तंग’ होने लगा है। बजट व्यवस्था में असंतुलन पैदा हुआ तो अधिकारियों ने अब फिजूलखर्ची पर लगाम कसी है।
करीब 200 करोड़ मासिक खर्च वाले जीडीए ने अब प्रतिदिन अधिकारियों के कमरों में होने वाली ‘फ्लोवर डेकोरेशन’ को प्रतिबंधित कर दिया है। अधिकारियों की टेबल पर सजने वाले फूलों के गुलदस्ते पर ही प्रतिमाह करीब 70 हजार से एक लाख रुपये खर्च हो रहे थे।
इसी प्रकार विभिन्न अनुभाग अधिकारियों के कक्ष के लिए प्राधिकरण कोष से जलपान संबंधी व्यवस्था को भी समाप्त कर दिया गया है। जलपान की व्यवस्था अब अधिकारियों को स्वयं के खर्च पर ही करनी होगी। इतना ही नहीं अधिकारियों के कार्यालयों में आने वाले समाचार पत्रों की मद में भी कटौती कर दी गई है।
अब दैनिक समाचार पत्रों की सिर्फ एक-एक प्रति प्राधिकरण की लाइब्रेरी में ही उपलब्ध रहेगी।जीडीए के वित नियंत्रक टीआर यादव के अनुसार मेट्रो योजना, एलिवेटेड रोड योजना और चंद्रशिला अपार्टमेंट योजना में जीडीए का काफी पैसा लगा है। मेट्रो योजना में जीडीए को 1400 करोड़ देने हैं। इसमें से 590 करोड़ दिए जा चुके हैं।
एलिवेटेड रोड भी 1170 करोड़ की परियोजना है। फिलहाल प्राधिकरण का पैसा कहीं से आ नहीं रहा है। इसी के चलते खर्चों में कुछ कटौती की गई है।जीडीए वीसी विजय यादव ने बताया कि कुछ ऐसे खर्चों में कटौती की गई है, जोकि अनावश्यक ही किए जा रहे थे। हमें लगा कि यह फजूलखर्ची बंद होनी चाहिए। इसलिए वित्त नियंत्रक को आदेश जारी किया गया है।