फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रोजेक्ट लेट हुआ तो जीडीए-आविप भी देंगे पेनल्टी

Tue, 02 May 2017 11:42 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
विज्ञापन
परियोजना - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन
रीयल एस्टेट रेग्यूलेशन एक्ट (रेरा) का शिकंजा जीडीए समेत तमाम आवासीय अथॉरिटी व परिषद पर भी कसेगा। प्राइवेट बिल्डरों की तरह जीडीए और आवास विकास परिषद को भी अपनी आवासीय और व्यावसायिक योजनाओं का निर्माण समय पर पूरा करना होगा।
विज्ञापन


अगर प्रोजेक्ट देरी से कंप्लीट होने या समय पर हैंडओवर देरी से होनी की स्थिति में जीडीए, आवास विकास परिषद को भी आवंटियों को पेनल्टी देनी होगी। जीडीए के चार प्रोजेक्ट रेरा के दायरे में आ गए हैं।

नए गाजियाबाद स्टेशन के पास चंद्रशिला अपार्टमेंट योजना, सदरपुर में मधुबन-बापूधाम आवासीय योजना, लोनी के पास इंद्रप्रस्थ योजना और भोपुरा के पास कोयल एंक्लेव आवासीय योजना शामिल हैं। जीडीए ने इन योजनाओं को लांच तो किया, लेकिन समय पर पूरा नहीं कर पाया।
विज्ञापन


इनमें करीब 2100 फ्लैट ईडब्ल्यूएस श्रेणी के बनाए जाने हैं, जिनके लिए आवंटी पजेशन को लेकर चक्कर काट रहे हैं। अब रेरा लागू होने के बाद जीडीए की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। उधर, बिल्डरों की भी सांसे अटकी हुई हैं।

बता दें कि गाजियाबाद में करीब 100 से ज्यादा निर्माणाधीन प्रोजेक्ट रेरा के दायरे में आ गए हैं, जिन पर शिकंजा कसने वाला है।  

रेरा की वेबसाइट पर देनी होगी पूरी डिटेल
जीडीए को भी रेरा की वेबसाइट पर अपने प्रोजेक्ट की पूरी डिटेल देनी होगी। इसमें फ्लैट या दुकान का कारपेट एरिया, कवर्ड एरिया, प्रोजेक्ट पूरा होने की तारीख समेत तमाम जानकारी वेबसाइट पर देनी होंगी। प्रोजेक्ट से जुड़े घोषणाओं का जीडीए को पालन करना होगा।

बिल्डर प्रोजेक्ट की मॉनीटरिंग भी होगी जीडीए के जिम्मे
रेरा में मॉनीटरिंग के लिए प्रदेश स्तर पर अलग स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। अफसरों की नियुक्ति के साथ-साथ शिकायतों के लिए ट्रिब्युनल भी बनाया जाना है, लेकिन बिल्डरों के प्रोजेक्ट की मॉनीटरिंग स्थानीय स्तर पर जीडीए के जिम्मे होगी। जीडीए वीसी कंचन वर्मा का कहना है कि प्रदेश स्तर पर अभी इसका नोटिफिकेशन होना है।

प्रदेश स्तर पर रेरा में आंशिक संशोधन किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इसको लेकर तैयारियां की जा रही है, लेकिन फिलहाल शासन से इस संबंध में कोई डाटा नहीं मांगा गया है।

बिल्डरों की भी बढ़ी टेंशन
रेरा लागू हो जाने से बिल्डरों की टेंशन भी बढ़ गई है। बिल्डर पुराने प्रोजेक्ट के लिए कुछ राहत मांग रहे हैं। मोदीनगर में 935 अफोर्डेबल फ्लैट का निर्माण कर रहे सिक्का बिल्डर्स के मैनेजर मंजीत सिंह का कहना है कि पुराने प्रोजेक्ट में सरकारी विभागों की वजह से भी देरी हुई है।

एनओसी और अन्य परमिशन लेने में ही छह महीने से एक साल का समय लग जाता है। ऐसे में पुराने प्रोजेक्ट को कुछ रिलेक्सेशन मिलना चाहिए। वहीं इसकी मॉनीटरिंग करने वाली अथॉरिटी सुनिश्चित करें कि बिल्डर को सभी एनओसी और परमिशन एक ही जगह से कम समय से उपलब्ध हो। तभी प्रोजेक्ट समय पर पूरे हो पाएंगे। 
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें