साहिबाबाद। इंदिरापुरम के अभय खंड स्थित सहकारी आवास समिति के प्लॉट को खाली कराने पहुंची जीडीए और पुलिस टीम पर शनिवार झुग्गीवासियों ने पथराव किया। ऐसे में पुलिस और जीडीए टीम ने भागकर खुद को बचाया।
हालांकि पथराव के बीच एसएसआई समेत तीन पुलिसकर्मियों को चोट आई है। जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। हालांकि प्राथमिक उपचार के बाद सभी को छुट्टी दे दी गई। इसी बीच पथराव की सूचना पर भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा।
उधर, हंगामे के बाद एडीएम सिटी ने मंगलवार को दोनों पक्षों को जमीन का विवाद निपटाने के लिए थाने बुलाया है। बताया जा रहा है कि जीडीए ने अभय खंड-2 में आकांक्षा राजस्व सहकारी समिति के नाम करीब 10 एकड़ का प्लॉट आवंटित किया था।
आरोप है कि जमीन के एक हिस्से पर फ्लैट बने हैं जबकि आधे हिस्से पर भोला नाथ गुप्ता का मकान और 30-35 परिवार झुग्गी हैं, जिसमें बड़ी संख्या में लोग रह रहे हैं। साल 2012 में आवास समिति ने प्लॉट खाली करवाने का प्रयास किया तो भोला नाथ गुप्ता गाजियाबाद कोर्ट से स्टे ले लिया।
भोला नाथ गुप्ता का कहना है कि जमीन उसकी है। बीती 5 मार्च 2017 को कोर्ट ने स्टे खारिज कर दिया। जिसके बाद समिति ने मानवाधिकार आयोग में जमीन खाली करवाने की गुहार लगाई थी।
सीओ इंदिरापुरम अनिल कुमार ने बताया कि जीडीए टीम के साथ पुलिस टीम जब शनिवार को जमीन खाली कराने पहुंची तो प्लॉट के गेट पर ताला लगा था। ताला खुलवाने का प्रयास किया तो वहां पर मौजूद महिलाओं और लोगों ने टीम पर पथराव कर दिया।
जीडीए और पुलिस टीम वहां से बचकर निकली। एडीएम सिटी प्रीति जायसवाल व एडीएम प्रशासन ज्ञानेंद्र सिंह ने लोगों से बात की, जिस पर भोला नाथ गुप्ता बाहर आया और सारे दस्तावेज पुलिस को दिखाते हुए अदालत में स्टे के खिलाफ अपील करने की बात कही। वहीं, एडीएम सिटी ने बताया कि मंगलवार को दोनों पक्षों को थाना इंदिरापुरम पर बुलाया गया है।
बिल्डर से मिलीभगत कर प्लॉट खाली कराने का आरोप
भोला नाथ गुप्ता और वहां रह रहे अन्य लोगों का आरोप है कि स्टे खारिज हुआ है लेकिन उसके खिलाफ अपील की गई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस व प्रशासन बिल्डर के साथ सांठगांठ कर उनसे घर छीनना चाहती है।
मथुरा के जवाहर बाग जैसे कांड की आशंका से डरी पुलिस
प्लॉट खाली कराने पहुंची पुलिस को यह बिल्कुल अंदेशा नहीं था कि इस तरह विरोध होगा। लोगों ने अचानक पथराव किया तो पुलिस को जान बचाकर भागना पड़ा। भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा इसके बाद भी लोग विरोध करने पर उतारू थे।
प्रशासनिक अधिकारियों को अंदेशा था कि बल प्रयोग करने पर लोगों का विरोध और उग्र हो सकता है। ऐसे में मथुरा के जवाहर बाग जैसा हाल भी हो सकता है। जिसके चलते प्रशासनिक अधिकारियों ने शांतिपूर्ण ढंग से मामले को सुलझाना सही समझा।