धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों को नूरगंज कालोनी की घटना से इंसानियत का सबक लेना चाहिये। मुस्लिम समाज के लोगों ने हिंदू महिला की मौत पर उसका अंतिम संस्कार हिंदू रीति रिवाज से किया। हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का यह मामला क्षेत्र में चर्चा बना हुआ है।
नूरगंज कालोनी निवासी संतोषी देवी(65) मूलरूप से अलीगढ़ की रहने वाली थी। करीब बीस वर्ष से वह नूरगंज कालोनी में एक किन्नर के साथ रह रही थी। कालोनी निवासी अब्दुल वाहिद और उसकी पत्नी संतोष देवी को अपनी मां समझकर सेवा करने लगे। अब्दुल वाहिद ने संतोषी देवी के लिए मकान में एक मंदिर भी बना रखा था। एक कमरे में पूजा होती तो दूसरे कमरे में नमाज अदा होती।
सोमवार को बुखार के कारण संतोषी देवी की मौत हो गई। महिला का कोई रिश्तेदार न होने के कारण मुस्लिम समाज के लोगों ने मृतका का हिंदू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार किया।
वाहिद खान और सिराज खान ने बताया कि बृहस्पतिवार को गढ़मुक्तेश्वर में संतोषी देवी के फूल गंगा में विसर्जन करके 21 ब्राह्मणों को भोज कराया जाएगा। इसके बाद विधि पूर्वक उनकी अरिष्ठी भी की जाएगी।
बताया गया है कि बीस वर्ष पूर्व संतोष देवी के पति ने मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया था। नूरगंज कालोनी निवासी किन्नर मुन्नी उन्हें अपने साथ ले आई थी।