राजपुर गांव में सोमवार देर रात विवाह रिसेप्शन के बाद पड़ोस में रह रहे रजापुर ग्राम प्रधान के पति पर फायरिंग हुई। फायरिंग में ग्राम प्रधान के पति तो बाल-बाल बच गए लेकिन गोली लगने से एक भतीजे की मौत हो गई, जबकि दो भतीजे घायल हो गए।
घायलों को जीटीबी अस्पताल दिल्ली में भर्ती कराया है। उनकी हालत गंभीर है। पुलिस ने छह आरोपियों को हिरासत में लिया है। सोमवार को राजपुर गांव निवासी राजेंद्र के बेटे सोनू का विवाह रिसेप्शन था।
रिसेप्शन के बाद रात करीब साढ़े 11 बजे राजेंद्र के भतीजे और उसके 10 दोस्त पड़ोस में रहने वाली ग्राम प्रधान सरोज के घर के बाहर पहुंच गए। ग्राम प्रधान का पति चाहतराम घर के बाहर ही खड़ा था। उन्होंने पिस्टल और तमंचों से चाहतराम पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं लेकिन वह बचते हुए मौके से भाग गए।
इसी बीच फायरिंग की आवाज सुन कर प्रधान और चाहतराम के भतीजे भूपेंद्र उर्फ बिट्टू, बबली और कुलदीप बाहर आए तो आरोपियों ने उन पर भी ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। भूपेंद्र के पेट में दो, बबली के कमर-कंधे और कुलदीप की बाईं बाजू में एक गोली लगी।
आसपास के लोग तीनों को स्वामी दयानंद अस्पताल ले गए, जहां से उन्हें जीटीबी अस्पताल रेफर कर दिया गया, वहां डाक्टरों ने भूपेंद्र को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने वारदात में शामिल छह युवकों को हिरासत में ले लिया है।
लोनी कोतवाली एसएचओ ओपी चौधरी ने बताया कि परिजनों ने रणवीर, मनवीर, कल्लू, जोगेंद्र, लीलू, विक्की, कमल, आनंद और दो अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
30 राउंड फायरिंग से गांव में हड़कंप, दूसरा पक्ष भी लेकर पहुंचा हथियार गांव में वारदात के दौरान करीब 30 राउंड फायरिंग हुई।
ताबड़तोड़ गोलियों की आवाज से गांव में हड़कंप मच गया। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद घायल भतीजों के पक्ष के लोग भी मौके पर हथियार लेकर पहुंचे लेकिन तब तक हमलावर फरार हो चुके थे।
कहीं फायरिंग के पीछे 2010 से चली आ रही रंजिश तो नहीं
राजेंद्र के भाई जगमाल की वर्ष 2010 में हत्या कर दी गई थी। भाई की हत्या का शक चाहतराम पर था लेकिन जांच में चाहतराम के खिलाफ कोई सुबूत नहीं मिले थे लेकिन गांव में चर्चा है कि तभी से राजेंद्र चाहतराम से रंजिश रखता था। हो सकता है कि इसी चलते चाहतराम पर हमला किया गया हो।