कनावनी गांव में आढ़ती के परिवार को बंधक बनाकर तीन बदमाश 28 तोले सोने के जेवर और 15 हजार रुपये लूटकर ले गए हैं। इस दौरान उन्होंने चुन्नी से महिला का गला घोंटने की कोशिश की, जिससे वह बेहोश हो गईं। पुलिस वारदात में किसी करीबी का हाथ मान रही है।
साहिबाबाद मंडी में आढ़ती बाबूराम कनावनी गांव में परिवार के साथ रहते हैं। परिवार में उनके पिता जग्गन सिंह, मां फूलवती, बेटा सचिन, बहू सीमा, भाई प्रकाश, भाभी मुनेश, उनकी बेटी कुनिका और दो पोतियां समेत कुल 14 लोग हैं।
मंगलवार रात करीब ढाई बजे कमरे में खटपट की आवाज सुनकर प्रकाश की पत्नी मुनेश जाग गईं। उन्होंने देखा कि तीन बदमाश मोबाइल की टॉर्च जलाकर अलमारी से माल निकाल रहे हैं। उन्होंने शोर मचाने का प्रयास किया तो एक बदमाश ने मुंह बंद कर चुन्नी से उनका गला दबा दिया और गर्दन के पास किसी हथियार से वार किया, जिससे वह बेहोश हो गईं।
करीब 20-25 मिनट बाद होश आया तो मुनेश ने शोर मचा कर साथ में सो रही बेटी कुनिका, पोती मंचिका और नव्या को जगाया। शोर सुनकर परिवार के अन्य लोग भी कमरे में आए और पुलिस को मामले की सूचना दी। बदमाशों ने दो और कमरों को बाहर से बंद कर दिया था।
बाबूराम ने कमरों को खोला और छत पर जाकर लाइसेंसी रिवाल्वर से दो फायर किए, मगर तब तक बदमाश करीब 28 तोले सोने के जेवर, 15 हजार कैश और मुनेश के कान का एक कुंडल लूटकर फरार हो चुके थे। बदमाशों के हमले से मुनेश का कान कट गया था और उनके कान से खून बह रहा था। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है।
पहले देरी से आई पुलिस, बाद में की बदसलूकी
परिजनों ने आरोप लगाया कि 2:45 बजे कंट्रोल रूम पर पुलिस को सूचना दी गई थी, मगर पुलिस 3:18 बजे मौके पर पहुंची। आधा घंटा देरी से आई पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी करते हुए अभद्र भाषा में बात की।
परिजनों ने मीडिया को कॉल किया तो पुलिस ने उन्हेें फटकार लगाई। आरोप है कि पुलिस ने पीड़ितों की तहरीर को बदलवाते हुए चोरी की तहरीर लिखवाई। बाद में चोरी की ही रिपोर्ट दर्ज की गई। पीड़िता मुनेश ने बताया कि मंगलवार दोपहर दो युवक उनके घर पर आए थे और पूछा था कि बाबू का घर यही है। ऐसे में शक है कि दोनों युवक रेकी के लिए आए थे।
घटना में कई पेंच भी आए सामने
एसओ इंदिरापुरम ने बताया कि अनुसार घटना में किसी अपने का ही हाथ लग रहा है। घर के चारों ओर कीचड़ था, मगर कहीं भी किसी बदमाश के पैरों के निशान नहीं मिले हैं। हालांकि पिछली दीवार के पास पैर का एक निशान है, लेकिन वह पुराना है।
इसके अलावा फिंगर प्रिंट्स भी नहीं मिले हैं। पुलिस के अनुसार, अलमारी और लॉकर लॉक टूटा नहीं, बल्कि चाभी से खोला गया है। अगर मास्टर-की का उपयोग किया गया होता तो ताला खराब हो गया होता।
इतना ही नहीं, बदमाश लॉकर में चांदी की ज्वैलरी और हजार के नोट की एक गड्डी भी वहीं छोड़ गए। कमरे में इतना सब हुआ और मुनेश की बेटी कुनिका और पोती नव्या व मंचिका की आंख भी नहीं खुली। जेवरात का एक डिब्बा बाहर खेत में मिला, जबकि बाकी डिब्बे लॉकर के अंदर ही थे।