नेहरू नगर स्थित एक अस्पताल में शुक्रवार को इलाज के दौरान तीन साल के बच्चे की मौत हो गई। इससे गुस्साए परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में हंगामा कर जमकर तोड़फोड़ की। इससे वहां काफी देर तक अफरातफरी मची रही।
सूचना मिलने पर पुलिस ने पहुंचकर आक्रोशित लोगों को समझाबुझा कर शांत कराया। बाद में परिजनों ने पुलिस तहरीर देकर इलाज में लापरवाही व प्रबंधतंत्र पर मारपीट का आरोप लगाया। तहरीर के आधार पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की पड़ताल शुरू कर दी है।
सिद्घार्थ विहार मोहल्ले की गली नंबर एक निवासी संजय यहां परिवार के साथ रहते हैं। संजय के मुताबिक बुधवार सुबह तकरीबन 11 बजे उन्होंने बुखार से पीड़ित अपने बेटे नितेश (3) को नेहरू नगर स्थित गणेश अस्पताल में भर्ती कराने के साथ उसी दिन 25 हजार व अगले दिन बृहस्पतिवार को 10 रुपये जमा कराया।
शुक्रवार की सुबह अचानक बेटे की तबियत बिगड़ने पर वेंटीलेटर पर रखा गया। परिजनों का आरोप है कि इस पर अस्पताल से उसे रेफर करने की मांग की, लेकिन अस्पताल के डॉक्टर ने हालत ज्यादा नाजुक बताते हुए रेफर करने से इंकार कर दिया। साथ ही 10 हजार रुपये और जमा कराने के लिए कहा।
बकौल संजय 10 हजार रुपये जमा कराने के कुछ ही देर बाद डॉक्टर ने आकर उन्हें बेटे के मौत की सूचना दी। यही नहीं बेटे के शव को तुरंत अस्पताल से ले जाने का दबाव बनाने लगे। विरोध करने पर उनके भाई मोनू के साथ मारपीट की गई।
बताते हैं कि मारपीट की घटना से परिजनों का गुस्सा भड़क उठा। आक्रोशित घर वालों ने अस्पताल परिसर में खूब हंगामा किया। डॉक्टर के केबिन के शीशे तोड़ने के साथ ही घूम-घूम कर कई जगह तोड़फोड़ की।
इस बीच अस्पताल प्रबंधन की सूचना पर सिहानी गेट थाने की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर गुस्साए परिजनों को समझाबुझा कर शांत कराया। बाद में परिजनों की शिकायत पर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ लापरवाही की रिपोर्ट दर्ज की। एसएचओ सिहानी गेट परशुराम ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।
जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।संजय के परिवार में पत्नी रजनी और बेटी लक्ष्मी (7) हैं। नितेश की मौत के बाद मां रजनी का रो-रोकर हाल बेहाल है। रजनी ने बताया कि उनका बेटे को हल्का-सा बुखार था।
अस्पताल में इलाज कराने आई थी, यहां डॉक्टरों की लापरवाही से उनके बेटे की सांस थम गई। वहीं, भतीजे की मौत के बाद उसकी बुआ अस्पताल में ही बेहोश हो गई। प्राथमिक उपचार के बाद उसे होश आया।