पुत्रवधू की दहेज मृत्यु के केस में डासना जेल में बंद पूर्व सांसद नरेंद्र कश्यप ने शनिवार को 100 दिन बाद खुली हवा में सांस ली। हालांकि उनकी पत्नी देवेंद्री और बेटा डॉ. सागर अभी भी जेल में हैं।
शाम करीब साढ़े चार बजे कोर्ट से उनकी जमानत का परवाना डासना जेल पहुंचा, तभी से उनके काफी समर्थक और रिश्तेदार जेल के बाहर पहुंच गए। कागजी कार्रवाई कर शाम करीब साढे़ छह बजे उन्हें जेल से छोड़ा गया।
इस दौरान उनकेसमर्थकों ने नारेबाजी करने की कोशिश की, लेकिन सांसद ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद वह कार में घर रवाना हो गए। संजयनगर स्थित घर पर भी उनके सैकड़ों समर्थक मौजूद थे। घर पर उन्होंने रोते हुए हिमांशी के फोटो पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
इसके बाद घटनास्थल पर गए और फिर कमरे में शांत होकर बैठ गए। इस दौरान समर्थकों की भीड़ और उनके वाहनों की वजह से रोड पर जाम लग गया। देर रात तक उनसे मिलने आने वालों का तांता लगा रहा।
बता दें कि बुधवार को हाईकोर्ट से उनकी जमानत मंजूर हो गई थी। शुक्रवार को जमानत के कागज सीजेएम कोर्ट गाजियाबाद पहुंच गए थे। यहां उनके दो जमानतियों के एक-एक लाख के बेल बांड और एक लाख का पर्सनल बांड भरा गया था, जिनका वेरिफिकेशन शनिवार को पूरा हुआ।
नरेंद्र कश्यप के जमानतियों में उनके भाई प्रमोद की पत्नी ममता और सदरपुर केउनके दोस्त रामवीर सिंह हैं। बता दें कि सांसद नरेंद्र कश्यप की पुत्रवधू हिमांशी की छह अप्रैल को रहस्यमय हालात में गोली लगने से मौत हो गई थी। इस मामले में कविनगर थाने में दहेज मृत्यु की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, जिसमें नरेंद्र कश्यप सात अप्रैल से डासना जेल में बंद थे।
‘पत्नी और बेटे भी जल्द ही आएंगे बाहर’
जेल से निकलने पर पूर्व सांसद नरेंद्र कश्यप ने कहा कि वह जल्द ही पत्नी और बेटे को भी जेल से बाहर निकलवाने की कोशिश करेंगे। उन्हें कानून पर पूरा विश्वास है। जेल में परेशानी के सवाल पर उन्होंने कहा कि जेल तो जेल है। उन्हें पुत्रवधू की मौत का बेहद अफसोस है।