पिछले दो माह से पब्लिक स्कूलों में बढ़ी फीस का विरोध कर रहे अभिभावकों के लिए बुरी खबर है। जांच रिपोर्ट आने से ठीक एक दिन पहले ही जिला प्रशासन ने इस मामले में सीधे कार्रवाई करने से साफ इंकार कर दिया है।
डीएम मिनिस्ती एस. का कहना है कि निजी स्कूलों की मनमानी की शिकायत पर शासन स्तर से कमेटी गठित की गई है। वही कमेटी अब कोई निर्णय लेगी।बुधवार को लिए गए प्रशासन के इस फैसले के बाद उन अभिभावकों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है, जिन्होंने स्कूलों में बढ़ी हुई फीस जमा नहीं की है।
स्थिति अभी भी साफ नहीं है कि अभिभावक अब बढ़ी हुई फीस जमा करेंगे या शासन की रिपोर्ट आने तक उन्हें राहत मिलेगी। अभिभावकों की इस परेशानी और जिज्ञासा का जिला प्रशासन के पास भी कोई उत्तर नहीं है।
स्कूलों की मनमानी के खिलाफ दो माह से अभिभावक लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा कार्रवाई कराने की मांग पर अड़े अभिभावकों ने सड़क पर जाम भी लगाया और पुलिस के डंडे भी खाए।
इन सबके बाद प्रशासन ने अभिभावकों और स्कूलों की संयुक्त बैठक में अभिभावकों को 11 मई तक एनुअल चार्ज जमा न करने की बात कही थी। डीएम ने एडीएम फाइनेंस राजेश कुमार के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन करके रिपोर्ट मांगी थी।
अभिभावक इंतजार में थे कि प्रशासन उनके हित में फैसला सुनाएगा, मगर जांच रिपोर्ट जारी करने से एक दिन पूर्व ही डीएम मिनिस्ती एस. ने पत्रकार वार्ता में यह साफ कर दिया कि फीस मामले में अब अंतिम फैसला शासन करेगा। प्रशासन स्तर पर हुई जांच की रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी।
बढ़ी हुई फीस और एनुअल चार्ज जमा करने या न करने के सवाल पर भी प्रशासनिक अफसर अब चुप्पी साध गए हैं। डीएम ने सिर्फ इतना ने कहा कि वे इस मामले में अब कुछ नहीं कह सकतीं। अंतिम फैसला अब शासन को ही करना है।
उधर, अभिभावकों का कहना है इस तरह से स्कूल प्रबंधन अब बढ़ी हुई फीस तो वसूलेंगे ही साथ ही साथ अब उन्हें और उनके बच्चों प्रताड़ित भी करेंगे। अभिभावक संघ के उपाध्यक्ष सचिन सोनी का कहना है कि प्रशासन कोई फैसला सुनाए या न सुनाए, वह लोग किसी भी सूरत में एनुअल चार्ज जमा नहीं करेंगे।
स्कूल प्रबंधन यदि बच्चों का नाम काटता है तो बड़ा आंदोलन होगा। वहीं, अभिभावक सीमा त्यागी ने कहा कि जो योगी सरकार शराब के ठेके, और बूचड़खानों से लेकर महिला अपराध को रोकने के लिए रातोंरात फैसला ले लेती है और उस पर अमल कराती है। ऐसे में स्कूलों की मनमानी पर लगाम कसने में इतनी देरी आखिर क्यों हो रही है।
राज्य समिति में शामिल ओम पाठक का विरोध, सांसद से मिले पैरेंट्स
गाजियाबाद। पब्लिक स्कूलों द्वारा मनमाना शुल्क वसूलने पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार ने 9 सदस्यीय समिति गठित की है। यह कमेटी पब्लिक स्कूलों में बढ़ते फीस पर लगाम कसने को अपने सुझाव शासन को देगी।
समिति में रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर ओम पाठक (डीपीएसजी स्कूल प्रबंधक समिति के पदाधिकारी) के शामिल किए जाने पर गाजियाबाद के अभिभावकों ने विरोध जताया है।
ओम पाठक के विरोध और समिति पर पुनर्विचार करने के लिए गाजियाबाद के अभिभावक बुधवार को सांसद जनरल वीके सिंह से मिले और अपनी बात रखी। अभिभावकों ने सांसद को सीएम के नाम दिए ज्ञापन में बताया कि शहर में स्कूलों की मनमानी को हवा देने में ओम पाठक ही जिम्मेदार हैं।
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