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मंडलायुक्त की कमेटी करेगी निगम की कब्जाई जमीनों का सर्वे

Sat, 14 Jan 2017 11:41 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
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bulandshahr gangrape - फोटो : अमर उजाला
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राजनगर एक्सटेंशन, नूरनगर, सिहानी में हाईराइज बिल्डिंगों के बीच आ चुकी निगम की बेशकीमती जमीन पर कब्जे होने लगे हैं। निगम की करीब 60 एकड़ से ज्यादा जमीन निगम के संपत्ति रिकार्ड में तो है, लेकिन मौके पर नहीं दिख रही।
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अरबों की इस जमीन को चिह्नित कराने के लिए नगर आयुक्त और महापौर के पत्र पर अब मंडलायुक्त ने टीम गठित की है। एसडीएम के नेतृत्व में राजस्व विभाग और नगर निगम की टीम ज्वाइंट पैमाइश कर जमीन तलाशेगी। चुनाव में व्यस्तता के चलते अब यह काम निर्वाचन के बाद होगा।

नगर आयुक्त अब्दुल समद ने नवंबर महीने में मंडलायुक्त को घूकना, सिहानी, नूरनगर, सद्दीक नगर और बोंझा गांव की उन खसरा नंबरों की भी लिस्ट भेजी थी जो सरकारी रिकार्ड में नगर निगम के नाम हैं। राजनगर एक्सटेंशन बसने के बाद जमीनों की कीमतें बढ़ी तो कालोनाइजरों की निगाहें इन जमीनों पर लग गई।
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माना जा रहा है कि इनमें से अधिकांश जमीनों पर कब्जा हो चुका है। शहर की सूरत बदल जाने के बाद अब इन जमीनों को चिह्नित कर पाना निगम के लिए मुश्किल है। ऐसे में अब राजस्व विभाग की मदद से इन जमीनों को फिर से चिह्नित कराकर कब्जा लेने की तैयारी की जा रही है।
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तार फेंसिंग हो तो बच सकती हैं जमीनें
नगर निगम सदन जमीनों को बचाने के लिए कई बार प्रस्ताव पास कर चुका है। सरकारी जमीनों की तार फेंसिंग के लिए बजट में 1.5 करोड़ का फंड भी दिया जा चुका है, बावजूद इसके तार फेंसिंग नहीं कराई गई। तार फेंसिंग न होने की वजह से सरकारी जमीनों को कब्जाना भूमाफियाओं के लिए आसान हो जाता है।
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यहां जमीन खाली करा चुका निगम
नगर निगम बीते दो साल में 10 से ज्यादा स्थानों पर जमीन खाली करा चुका है, लेकिन फिर कब्जे हो जाते हैं। निगम ने बीते दिनों एनएच-24 पर तिगरी कट के पास जमीन से अवैध कब्जा हटाया था। दिसंबर महीने में नंदग्राम के पास निगम ने जमीन खाली कराई थी।

यहां महिलाओं ने निगम की टीम को बंधक बना लिया था। इससे पहले गढ़ी गांव में तालाब की जमीन को खाली कराया गया था। यहां भी गांव के लोगों ने निगम की टीम पर पथराव कर दिया था। इनके अलावा सदरपुर, नूरनगर, डूंडाहेड़ा समेत कई क्षेत्रों में जमीनों को खाली कराया गया है।
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अधिकारी बोले
राजस्व रिकार्ड में निगम के नाम दर्ज जमीनों को चिह्नित कराने के लिए मंडलायुक्त के आदेश पर टीम का गठन हो चुका है। चुनाव बाद सर्वे कराकर जमीनों को चिह्नित किया जाएगा। पैमाइश कर जमीनों की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। - एमपी सिंह, संपत्ति अधिकारी, नगर निगम
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