अब खेती की जमीन पर प्लॉटिंग करना भारी पड़ेगा। खेतों में प्लॉटिंग कर सस्ते आशियाने का सब्जबाग दिखाकर लोगों को फंसाने वाले कालोनाइजरों पर प्रदेश सरकार ने शिकंजा कस दिया है। आवास एवं शहरी नियोजन मंत्री सुरेश पासी ने लखनऊ में जीडीए अफसरों की बैठक में अवैध कालोनियों पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने अवैध प्लॉटिंग करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। यानी अब नूर नगर, सिहानी, मोरटी, कनावनी, रईसपुर, सदरपुर, करहेड़ा क्षेत्र में बसाई जा रही कालोनियों पर शिकंजा कसने वाला है।राज्यमंत्री सुरेश पासी ने बुधवार को समीक्षा बैठक से पहले अवैध निर्माण पर जीडीए से डाटा भी मांगा था।
उन्होंने अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण के आदेश और उनके अनुपालन की समीक्षा की। बैठक में मौजूद रहे जीडीए के प्रभारी वीसी रवींद्र गोडबोले ने बताया कि आवास मंत्री ने खेतों में अवैध रूप से बसाई जा रही कालोनियों पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। किसी भी सूरत में ऐसी प्लाटिंग नहीं होने दी जाएगी।
बैठक में इसके अलावा ऑनलाइन आवासीय मानचित्र, ग्रुप हाउसिंग व कामर्शियल मानचित्रों की स्वीकृति और उनकी पेंडेंसी की समीक्षा की। विकास कार्यों की वर्तमान स्थिति, महत्वपूर्ण योजनाओं की डिटेल और भविष्य की कार्ययोजना पर भी मंथन किया।
मेट्रो और एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट की बाधाएं होंगी दूर
आवास एवं शहरी नियोजन राज्यमंत्री सुरेश पासी ने गाजियाबाद के मेट्रो और एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट की जानकारी भी ली। जीडीए अधिकारियों ने मेट्रो प्रोजेक्ट की फंडिंग को लेकर पैदा हुए विवाद से भी अवगत कराया।
उन्होंने बताया कि मेट्रो की रिवाइज्ड डीपीआर यूपी कैबिनेट से पास न होने की वजह से केंद्र सरकार प्रोजेक्ट में अपनी हिस्सेदारी नहीं दे रही। माना जा रहा है कि आवास मंत्री इस समस्या का जल्द ही निस्तारण करा लेंगे।
दूसरी ओर, एलिवेटेड रोड के निर्माण के लिए पावर कारपोरेशन से हाईटेंशन लाइन का शटडाउन न मिल पाने की बाधा से भी मंत्री जी को अवगत कराया गया। उन्होंने इस समस्या के भी जल्द हल कराने का भरोसा दिलाया है।
15 साल में हो गए 18337 अवैध निर्माण
जीडीए सीमा क्षेत्र में 15 साल में 18337 अवैध निर्माण हो गए। जीडीए की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2017 महीने में ही अवैध निर्माण की 141 शिकायतें जीडीए पहुंची हैं। जीडीए ने इनमें से 7961 निर्माण को कंपाउंड कर दिया है।
जबकि 11143 मामलों में ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए थे, लेकिन महज 3854 निर्माण को ही ध्वस्त कर पाया। यानी बाकी मामले अभी भी लंबित हैं।