नौवीं क्लास तक पढ़ा बब्बल प्रॉपर्टी डीलिंग और थर्माकोल का बिजनेस करता है। उसने तेवतिया पर पिस्टल से पांच राउंड गोलियां चलाई थीं। बृहस्पतिवार को प्रेस कांफ्रेंस में उसने बताया कि जिस एके-47 से तेवतिया पर गोलियां बरसाई गईं, वह उसने चार माह पहले जंग लगी हालत में मनीष के पास देखी थी। मनीष ने उसे बताया था कि एके-47 उसके पास उसके पिता सुरेश दीवान के समय से है। बकौल बब्बल, हमले के दौरान वह भी फॉर्च्यूनर कार में सवार था और पिछली सीट पर बैठा था। वारदात के बाद वह हरिद्वार भाग गया था। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर में छिपा रहा, फिलहाल राजनगर एक्सटेंशन में परिवार के साथ रह रहा था। उसने बताया कि दिल्ली में प्रॉपर्टी डीलर वीरेंद्र सकलानी की हत्या उसने अपने एक दोस्त के कहने पर की थी। दोस्त की सकलानी से रंजिश थी। वह 2007 तक जेल में रहा था, इसके बाद से जमानत पर बाहर है।
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ब्रजपाल तेवतिया के हमलावर से जब्त सामान
- फोटो : अमर उजाला
दो साल पहले प्रॉपर्टी डीलिंग के दौरान उसकी मुलाकात मनीष के भाई विक्की से कॉमन फ्रेंड अमित के जरिए हुई थी। कार गिरवी रख विक्की से उसने 2.70 लाख रुपये उधार लिए थे, जो बाद में उसने लौटा दिए थे, तभी से वह मनीष और विक्की के टच में था। वारदात में रेकी के लिए इस्तेमाल की गई वेरना कार उसी की थी। उसने वारदात के लिए पैसे नहीं लिए, दोस्ती में हमला किया था। उसने बताया कि वह रिटायर्ड हेड कांस्टेबल जयदीप के साथ भी प्रॉपर्टी डीलिंग कर चुका है। बता दें कि जयदीप 26 जून को कविनगर में हुई बिल्डर धीरज की हत्या में वांटेड है। पुलिस उसकी भी तलाश में जुटी है। जयदीप की बेटी सायरा सिरोही नेशनल तैराक थी, जिसने 24 जनवरी की रात कविनगर के आरकेपुरम में सुसाइड कर लिया था।
बुलंदशहर के बदमाशों ने लूटी थी गुड़गांव से फॉर्च्यूनर
एसएसपी ने बताया कि जिस फॉर्च्यूनर कार से तेवतिया पर हमला किया गया था, वह बुलंदशहर गुलावठी के बदमाशों गौरव, बबली, विपिन, नीटू आदि ने गुड़गांव से 8 जून को लूटी थी। इसे बाद में मनीष ने एक लाख रुपये में खरीदा था। कार लूटने वालों आरोपियों के बारे में पुलिस को जानकारी मिल गई है।
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ब्रजपाल तेवतिया का हमलावर गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
52 राउंड गोलियां चलाए जाने की हुई पुष्टि
पुलिस जांच में तेवतिया पर हुए हमले में 52 राउंड गोलियां चलने की पुष्टि हो गई है। हालांकि गोलियां और एके-47 समेत बरामद किए गए बाकी हथियार अभी जांच के लिए फोरेंसिक लैब लखनऊ या आगरा नहीं भेजे गए हैं।
अभी तक गिरफ्तारी
17 अगस्त को निशांत उर्फ जीतू, राहुल त्यागी, रामकुमार उर्फ राम और जितेंद्र उर्फ पोपे।
19 अगस्त को अभिषेक, गौरव।
फरार आरोपी
मनोज, मनीष, विक्की, शौकेंद्र, संसार सिंह
संदिग्ध
पहलवान, बिट्टू और शेखर
अनसुलझे सवाल
- एके 47 कहां से आई?
- क्या सुरेश दीवान के पास थी एके 47?
- कहां हैं मुख्य सूत्रधार मनोज-मनीष?
- सुपारी की रकम कितनी थी?
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ब्रजपाल तेवतिया का हमलावर बब्बल
- फोटो : अमर उजाला
तेवतिया प्रकरण में पुलिस कनेक्शन
तेवतिया प्रकरण में पीड़ित से लेकर आरोपी तक का पुलिस कनेक्शन है। ब्रजपाल तेवतिया खुद सिपाही रहे थे। सुरेश दीवान भी सिपाही था। आरोपी मनीष सुरेश दीवान का बेटा है और मनोज भतीजा। बब्बल के मामा प्रीतम सिंह इंस्पेक्टर थे। बाकी आरोपी मनीष, मनोज और बब्बल के दोस्त हैं।
ब्रजपाल के भाई ने दो संदिग्धों को अस्पताल में देखा
बीजेपी नेता ब्रजपाल तेवतिया के भाई विकास तेवतिया ने शक जाहिर किया है कि दो संदिग्ध लोग मंगलवार रात दो बजे फोर्टिस अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन वह पांचवीं मंजिल तक नहीं पहुंच सके, जहां ब्रजपाल भर्ती हैं। दोनों युवकों ने बताया था कि वह परिजनों के लिए खाना लेकर आए हैं। जब परिजनों ने पूछा कि यह खाना किसने पहुंचाया है तो उन्होंने तेवतिया के एक रिश्तेदार का नाम लेकर लिया। जब परिजनों ने रिश्तेदार से पूछा तो उन्होंने इंकार कर दिया। भाई विकास ने बताया कि जब से उनके बडे़ भाई के ठीक होने की खबरें प्रकाशित हो रही हैं तब से कुछ संदिग्ध लोग अस्पताल में देखे गए हैं। इसकी जानकारी पुलिस को दी गई है और पुलिस ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। पुलिस संदिग्धों की तलाश में सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है।
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ब्रजपाल तेवतिया का हमलावर गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
किसानों के साथ पार्षद ने किया प्रदर्शन
ब्रजपाल तेवतिया गोलीकांड मामले में रईसपुर गांव के पार्षद हरीश चौधरी ने किसानों के साथ कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। हरीश का कहना था कि ब्रजपाल तेवतिया किसान नेता हैं और हमेशा किसानों के दुख-दर्द में शामिल रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि इस गोलीकांड के सभी आरोपियों को पुलिस जल्द से जल्द गिरफ्तार करे। इसके साथ ही पुलिस यह भी बताए कि एके-47 आरोपियों के पास कहां से आई। उनका कहना था कि पुलिस-प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले। उन्होंने एलान किया कि इस गोलीकांड के विरोध में मुरादनगर स्थित गुड़ मंडी में महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। प्रदर्शन में देवेंद्र चौधरी, रणवीर सिंह, अमित चौधरी, विरेंद्र आदि मौजूद रहे।
प्रीतम सिंह ने खत्म की थी गाजियाबाद की गैंगवार
तेवतिया हमला प्रकरण में पुलिस के हत्थे चढ़ा बब्बल एसटीएफ के इंस्पेक्टर प्रीतम सिंह का भांजा है। प्रीतम सिंह गाजियाबाद के लिए बड़ा नाम है, उन्होंने यहां की गैंगवार खत्म की थी। वर्ष 2013 में उन पर फिल्म बनी थी जिला गाजियाबाद, जिसमें संजय दत्त ने उनसे प्रेरित रोल प्ले किया था। प्रीतम सिंह की पांच नवंबर 1998 को कविनगर में उनके घर के गेट पर सुबह सात बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। एके-47 और 9 एमएम की पिस्टलों से गोलियों से बरसाईं गई थीं। प्रीतम सिंह उस वक्त मुरादाबाद पीटीएस में तैनात थे। घर पर आए हुए थे। प्रीतम सिंह मूल रूप से बिजनौर जिले के रहने वाले थे। इस केस में चार लोगों को नामजद किया गया था। 13 फरवरी 1999 को दिल्ली पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। इनमें मुख्य आरोपी कुख्यात श्रीप्रकाश शुक्ला गैंग का सदस्य था।
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तेवतिया पर हमले के आरोपी गिरफ्तार
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फोर्टिस में भर्ती तेवतिया की सुरक्षा कड़ी
एसएचओ सेक्टर-58 जहीर खां ने बताया कि फोर्टिस अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद कर दी गई है। ब्रजपाल की सुरक्षा के लिए इंस्पेक्टर से लेकर कांस्टेबल तक 50 से ज्यादा लोगों की तैनाती अस्पताल में की गई है। दो शिफ्ट में दो प्लाटून पीएसी, दो इंस्पेक्टर, 8 एसआई, 26 कांस्टेबल सुरक्षा के लिए लगाए गए हैं। वहीं, विकास तेवतिया की सहमति के बिना किसी को भी ब्रजपाल के कमरे तक नहीं ले जाया जा रहा है। उनकी अनुमति के बाद ही किसी को ब्रजपाल से मिलने दिया जा रहा है। वहीं, तेवतिया के समर्थक भी उनकी सुरक्षा में तैनात है। करीब 20 से 25 युवक तेवतिया के वार्ड के हर रास्ते पर तैनात हैं।
तेवतिया ने फोन पर ली घायल साथियों की सुध
भाजपा नेता ब्रजपाल तेवतिया की हालत में लगातार सुधार हो रहा है और बुधवार को उन्होंने अस्पताल में घूमकर कई चक्कर लगाए और परिजनों से हालचाल पूछा। इसके बाद उन्होंने घायल साथियों से फोन पर बातचीत करके हालचाल पूछा। पुलिस ने खुलासा किया था प्रीतम सिंह की हत्या 15 लाख रुपये सुपारी देकर कराई गई थी, इस हत्याकांड केपीछे कई रसूखदारों के नाम भी आए थे। प्रीतम सिंह 90 के दशक में गाजियाबाद आए थे, तब यहां सतबीर गुर्जर और महेंद्र फौजी के बीच गैंगवार छिड़ी हुई थी। गैंगवार को खत्म करने के लिए एसटीएफ का गठन किया गया था, जिसमें इंस्पेक्टर प्रीतम सिंह को गाजियाबाद भेजा गया था। बताया जाता है कि उस दौर में 150 से ज्यादा मर्डर हुए, जिनमें से कई की लाशें भी नहीं मिलीं।
मां नहीं चाहती थी मनीष करे हमला
बब्बल ने बताया कि मनीष की मां नहीं चाहती थी कि वह तेवतिया पर हमला करे। उन्होंने उसके पिता का वास्ता देकर उसे रोकने की कोशिश की थी, मगर वह नहीं माना। बब्बल का तो यह भी कहना है कि मनोज भी हमले के खिलाफ था, हालांकि बाद में उसने मनीष का साथ दिया।
बब्बल भी तो नहीं लेना चाहता बदला
बब्बल ने बताया कि प्रीतम सिंह ने उसकी अच्छे से परवरिश की थी, मगर वह उनके संस्कारों पर अमल नहीं कर सका और अपराध की दुनिया में आ गया। प्रेस कांफ्रेंस में एसएसपी से पूछा गया कि वारदात के पीछे बब्बल का भी कोई मकसद तो नहीं, इस पर एसएसपी ने कहा कि इस एंगल पर भी जांच की जा रही है।