मैं आज भी डरती हूं...
गाजियाबाद। मेट्रो हो, बस हो या फिर ऑटो, हर जगह घूरती निगाहें मुझे असहज कर देती हैं। कालेज और नौकरी पर जाते समय मुझ पर जो गुजरती है, उसे केवल मैं ही समझ सकती हूं। निर्भया कांड के पांच बरस बाद भी मैं इस शहर में सुरक्षित नहीं हूं। आए दिन मुझसे छेड़छाड़, लूटपाट और दिल को दहला देने वाली न जाने कितनी घटनाएं होती हैं। मैं रोज घर से निकलते समय यही सोचती हूं... काश आज मैं खुद को आजाद महसूस करूं, खुलकर सांस लूं अपने शहर की फिजा में मैं आज भी डरती हूं....
यह स्याह सच है शहर की हजारों-लाखों युवतियों और महिलाओं की, जो निर्भया की बरसी पर एक बार फिर अपने समाज से सवाल कर रही हैं। अपने समाज को आइना दिखा रही हैं कि निर्भया कांड के पांच वर्ष बाद भी बहुत कुछ नहीं बदला। आज भी शोहदे उन्हें राह चलते छेड़ते हैं, फब्तियां कसते हैं।
सरकारी की वुमन हेल्पलाइन 1090 के आंकडे़ भी नारी सुरक्षा के खोखले दावों की पोल खोल रहे हैं। गाजियाबाद में इस साल छेड़छाड़ के 7932 मामले दर्ज हुए हैं, जिसमें से अधिकतर मामले फोन पर उत्पीड़न के हैं। इन आंकड़ों में 20-25 उम्र वर्ग की महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है। 20-25 उम्र वर्ग की महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा वारदातें पेश आई हैं। गाजियाबाद में 15-20 उम्र वर्ग की 1509 शिकायतें, 20-25 उम्र वर्ग के 2907 शिकायतें, 25-30 उम्र वर्ग में 1523 शिकायतें और 30-40 उम्र वर्ग में1442 शिकायतों आई हैं। गाजियाबाद ही नहीं दिल्ली से सटे टीएचए में भी महिलाओं की सुरक्षा रामभरोसे है। टीएचए के विभिन्न थाना क्षेत्रों में महिलाएं, युवतियां अपने को सुरक्षित नहीं समझतीं। पिछले एक महीने यहां आठ मामले दुष्कर्म के आए हैं। चारों थानों में 74 मामले छेड़खानी के हैं। महिलाओं से 115 लूट और छीनाझपटी की वारदात हुईं हैं।
कहां गई पावर एंजल और शक्ति-100
महिलाओं की सुरक्षा के लिए गाजियाबाद प्रशासन ने पावर एंजल फोर्स और मोबाइल एप शक्ति-100 की शुरुआत की थी, जो अब गायब है, इन पर कोई काम ही नहीं हो रहा है।
बसों में नहीं लग सके सीसीटीवी
निर्भया कांड के छह महीने बाद शासन की ओर से निर्भया फंड से 20 करोड़ रुपये से सभी रोडवेज बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने थे। हालात यह हैं कि पांच साल में रोडवेज सिर्फ जिले की 10 पिंक बस और करीब 15 वोल्वो में सीसीटीवी कैमरे लगा सकी है जबकि 850 बसों में सीसीटीवी नहीं हैं।
बोली छात्राएं
कविनगर निवासी बीटेक स्टूडेंट स्नेहा ने बताया कि कालेज जाते वक्त सड़क पर अकेले चलने से डर लगता है। आज भी रास्ते में मनचले फब्तियां कसते हैं लेकिन पुलिस कहीं नजर नहीं आती है। राजनगर निवासी पूजा नोएडा की एक कंपनी में मैनेजर हैं। वह बताती हैं कि वह ऑटो से नोएडा तक का सफर करती हैं और ऑटो से ही घर आतीं हैं। महिलाओं के चलाए गए पिंक ऑटो तो सड़क पर दिखते ही नहीं है। मनचलों का सामना तो रोज ही करना पड़ता है।
बोले एसएसपी
महिलाओं को सुरक्षित घर तक पहुंचाने के लिए पुलिस सदैव तत्पर रहती है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस की नई प्लानिंग की जा रही है। महिलाओं पर हुए अपराध का निस्तारण किया जा रहा है।
- हरि नारायण सिंह, एसएसपी, गाजियाबाद
एंटी रोमियो अभियान का नाम तक भूले लोग
भाजपा की सरकार बनने के बाद टीएचए में एंटी रोमियो स्क्वायड का गठन किया गया था। शुरुआत में यह अभियान स्कूल, कॉलेज, मेट्रो स्टेशन आदि जगहों पर दिखाई दिया। महिलाओं के साथ छेड़खानी और बदसलूकी करने वाले कुछ लोगों को पकड़ा भी गया लेकिन धीरे धीरे इसने दम तोड़ दिया। अब तो लोग इस अभियान का नाम तक भूल गए हैं।
पिंक ऑटो प्लॉप, पिंक बस सेवा ने भी तोड़ा दम
महिला सुरक्षा को लेकर पिंक ऑटो और पिंक बस सेवा शुरू की गई थी। दोनों ही सेवाएं प्लॉप हो गईं हैं। गाजियाबाद में 22 जून को प्रशासन की ओर से पिंक ऑटो चलाए गए थे, जो सभी रूटों पर नहीं चल रहे हैं। रोडवेज की ओर से चलाई गई पिंक बस भी फेल साबित हुई है। यह सेवा सिर्फ लखनऊ रूट पर ही उपलब्ध है।
प्रदेश भर में महिला हेल्पलाइन पर करीब दो लाख शिकायतें
यूपी में 2017 जनवरी से लेकर 2017 अक्तूबर तक महिला हेल्पलाइन पर 1,83,299 शिकायतें मिलीं। शिकायतों के मामले में पहले नंबर पर लखनऊ और दूसरे नंबर पर कानपुर है। तीसरे पर इलाहाबाद, चौथे पर वाराणसी और पांचवें नंबर पर गोरखपुर है। इनमें से 87 फीसदी मामले फोन और सोशल साइट्स पर छेड़खानी करने के हैं। पश्चिमी यूपी की बात करें तो हापुड़ में महिला अपराधों के कम मामले हैं।
महिलाओं पर हुए अपराध के आंकड़े
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पुलिस विभाग द्वारा मिले आंकड़ों के आधार पर (15 नवंबर तक)
वर्ष अपराध दर्ज
2015 रेप 109
2016 रेप 132
2017 रेप 109
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2015 दहेज हत्या 37
2016 दहेज हत्या 37
2017 दहेज हत्या 39
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2015 महिला उत्पीड़न 712
2016 महिला उत्पीड़न 780
2017 महिला उत्पीड़न 039