गाजियाबाद। 28 साल पूर्व हुए भोजपुर मुठभेड़ मामले में अदालत में पेश नहीं होने पर बर्खास्त पूर्व आईपीएस ऑफिसर ज्योति एस बेलुर के खिलाफ सीबीआई कोर्ट ने सीबीआई से आख्या रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 16 जनवरी की तारीख लगाई है। सीबीआई ने 20 जुलाई 2020 और आठ जून 2021 को ज्योति बेलुर के प्रत्यर्पण के लिए लंदन सरकार को पत्र लिखा था। यूके अथारिटी ने 14 नवंबर 2022 को जवाब भेजकर कहा था कि वह ज्योति एस बेलुर को नहीं भेजेगी। इसके बाद सीबीआई ने जवाब दाखिल कर अनुरोध किया था कि अदालत फैसला सुना सकती है।
मोदीनगर के भोजपुर में आठ नवंबर 1996 को धनतेरस के दिन चार युवकों जलालुद्दीन, जसबीर, अशोक और प्रवेश की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने आउट ऑफ टर्न प्रमोशन के चक्कर में चारों की हत्या की थी। इस केस में विशेष सीबीआई कोर्ट ने दोषी तत्कालीन भोजपुर एसएचओ लाल सिंह, एसआई जोगेंद्र सिंह, कांस्टेबल सुभाष व सूर्यभान को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
सीबीआई ने 10 सितंबर 2001 को अपने आरोप पत्र में दावा किया था कि एक युवक जसबीर सिंह की मौत तत्कालीन आईपीएस ज्योति एस बेलुर की पिस्तौल से चली गोली से हुई थी। हालांकि आरोप पत्र में ज्योति का नाम नहीं लिया गया और कहा गया कि घटना वाले दिन वह गाजियाबाद में मौजूद नहीं थीं। पिस्तौल ज्योति के नाम पर आवंटित थी। इसलिए गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट ने उन्हें आरोपी बनाते हुए 14 सितंबर 2007 को वारंट जारी किया था।
अध्ययन अवकाश पर गईं, लौटकर नहीं आईं
ज्योति का मूल आईपीएस कैडर उत्तराखंड था। वर्ष 1993 बैच की आईपीएस अधिकारी ज्योति एस बेलुर को वर्ष 1996 में गाजियाबाद जिले के मोदीनगर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात किया गया था। साल-2001 में उन्हें अपने मूल कैडर में वापस भेज दिया गया लेकिन वह अपनी ड्यूटी पर एक बार भी उपस्थित नहीं हुई। इस बीच वह पढ़ाई करने के लिए अवकाश (स्टडी लीव) पर विदेश चली गई। स्टडी लीव समाप्त होने के बाद एक अक्तूबर 2005 से वह लापता हैं। गृह मंत्रालय 23 फरवरी 2017 में ज्योति को भारतीय पुलिस सेवा से बर्खास्त कर चुका है।