साहिबाबाद। आवास विकास परिषद की मंडोला ही नहीं, वसुंधरा और सिद्धार्थ विहार योजना में भी रिक्त भूखंडों के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। 2014 से विभाग इन्हें बेचने का प्रयास कर रहा है। खरीदार नहीं आए, लेकिन इन वर्षों में कीमतें दोगुनी से अधिक हो गईं। 25 अगस्त को परिषद ने 62 भूखंडों को नीलामी में लगाया, लेकिन अभी तक किसी पर बोली नहीं लगी।
ये सभी भूखंड एक हजार वर्ग मीटर से अधिक के हैं। परिषद ने 7 अगस्त को रिक्त भूखंडों की सूची जारी की थी, जिसके अनुसार दोनों योजनाओं में कुल 62 संपत्तियां बिक्री के लिए हैं। इनमें आवासीय फ्लैट, व्यावसायिक, संस्थागत भूखंड, ग्रुप हाउसिंग, होटल, स्कूल, अस्पताल और नर्सिंग होम की जमीन शामिल हैं।
सूची के मुताबिक वसुंधरा योजना-3 में 16 संपत्तियां खाली हैं, जिनमें कम्युनिटी सेंटर, शिक्षण संस्थान, व्यावसायिक प्लॉट, हेल्थ सेंटर और होटल की जमीन शामिल है। सिद्धार्थ विहार में 19 संपत्तियां खाली हैं, जिनमें पेट्रोल पंप, कमर्शियल प्लॉट, ग्रुप हाउसिंग, हाई स्कूल, नर्सिंग होम, होटल, मेडिकल फैसिलिटी और मिक्स्ड लैंड शामिल हैं। इसके अलावा वसुंधरा में 27 आवासीय फ्लैट भी खाली हैं, जिनमें एमआईजी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के फ्लैट हैं।
सिद्धार्थ विहार की कुछ बड़ी संपत्तियों की कीमत करोड़ों में है। सूची में 48.73 करोड़ की ग्रुप हाउसिंग, 77.47 करोड़ की दूसरी ग्रुप हाउसिंग और 145.78 करोड़ की मिक्स्ड लैंड संपत्ति दर्ज है। इसके अलावा 25 करोड़ का होटल/कमर्शियल प्लॉट और 15 करोड़ से अधिक की मेडिकल फैसिलिटी की जमीन भी शामिल है।
सेक्टर-7 के बड़े प्लॉट को तीन टुकड़ों में बांटा
परिषद के खाली प्लॉट बड़े साइज के हैं, जिनकी कीमत करोड़ों में है। पिछले दिनों परिषद ने सेक्टर-7 के 15 हजार वर्ग मीटर प्लॉट को तीन हिस्सों में बांटकर बेचा है। अधिकारी अब अन्य बड़े प्लॉटों को भी टुकड़ों में बेचने की योजना बना रहे हैं।
बोले अधिकारी
हमारे बड़े भूखंड हैं, जिनकी कीमत करोड़ो में हैं ऐसे में बड़े खरीदार ही इन्हें ले सकते हैं। हाल ही में हमने सेक्टर-7 के ग्रुप हाउसिंग वाले प्लॉट बेचे हैं, बड़े प्लाॅट बिकने में समय तो लगता है। हमें उम्मीद है कि जल्द ही हम अपने बचे हुए प्लॉट की बिक्री कर लेंगे। - अजय मित्तल, अधिक्षण अभियंता,आवास विकास परिषद