नगर निगम में बड़े स्तर पर गोरखधंधा चल रहा है। निगम अधिकारी और कई पार्षद अपने रिश्तेदारों के नाम पर निगम में ठेकेदारी कर रहे हैं। हालत यह है कि कोई भी ठेका छूटता है, वह सिर्फ चुनिंदा लोगों को ही दिया जाता है। ठेकेदारी के नाम पर अधिकारी और पार्षद मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। नगर निगम इन दिनों भ्रष्ट अधिकारियों और पार्षदों के चंगुल में है।
अधिकारी अपना मूल कामकाज छोड़कर अन्य कार्र्यों में लगे हैं, जिनसे उन्हें मोटा मुनाफा हो रहा है। जबकि निगम में रजिस्टर्ड ठेकेदारों को काम नहीं मिल पा रहा। सूत्र बताते हैं कि लाखों-करोड़ों रुपये के ठेके निगम अधिकारी अपने चहेते लोगों को देते हैं, जिसमें उनका कमीशन भी शामिल होता है। पार्षद जाकिर अली ने इस मामले में लिखित शिकायत मेयर को दी है।
इसमें मेयर अशु वर्मा ने पहली बार सख्त कदम उठाते हुए डीएम को पत्र लिखा है। पत्र में मेयर ने इस मामले में मजिस्ट्रेटी जांच करने की बात कही है। मजिस्ट्रेटी जांच में ही ये स्पष्ट हो पाएगा कि कौन से अधिकारी और पार्षद यह खेल कर रहे हैं।
निगम कार्यकारिणी की बैठक 3 सितंबर को
नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक 3 सितंबर को होगी। बैठक में पुनरीक्षित बजट पेश किया जाएगा, जिसमें पार्षद कोटे के रुके हुए कार्यों के लिए बजट की व्यवस्था की जाएगी। वर्तमान में कई वार्ड ऐसे हैं जहां विकास कार्य ठप हो गया है। निगम के पास पैसे की कमी है। वहीं कुछ माह बाद चुनाव आचार संहिता लगने वाली है। आचार संहिता लगते ही विकास कार्य रुक जाएंगे।